Edited By Vatika,Updated: 24 Feb, 2026 11:42 AM

फरवरी के आखिरी दिनों में जहां दोपहर की धूप गर्मी का एहसास करा रही है, वहीं सुबह-शाम की ठंड अभी भी बनी हुई
चंडीगढ़: फरवरी के आखिरी दिनों में जहां दोपहर की धूप गर्मी का एहसास करा रही है, वहीं सुबह-शाम की ठंड अभी भी बनी हुई है। मौसम के इस उतार-चढ़ाव के कारण वायरल इन्फ्लुएंजा (फ्लू) तेजी से फैल रहा है। शहर के बड़े सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में बुखार, खांसी और गले में दर्द की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या रोज बढ़ रही है। जी.एम.सी.एच. 32 Chandigarh के पल्मनरी क्रिटिकल केयर विभाग के प्रमुख डॉ. दीपक अग्रवाल के अनुसार, उनके अस्पताल में रोजाना 35 से 45 फ्लू के मरीज पहुंच रहे हैं। वहीं जी.एम.सी.एच. 16 Chandigarh में भी प्रतिदिन 25 से 30 नए मामले सामने आ रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों में मरीजों की संख्या में करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
आम सर्दी समझकर न करें नजरअंदाज
डॉक्टरों का कहना है कि कई लोग फ्लू को सामान्य जुकाम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो खतरनाक हो सकता है। इन्फ्लुएंजा वायरस नाक, गले और फेफड़ों पर एक साथ हमला करता है। संक्रमित होने के दो दिन के भीतर तेज और गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
फ्लू के मुख्य लक्षण
- ठंड के साथ तेज बुखार
- गले में दर्द और खराश
- लगातार खांसी
- सिर और शरीर में दर्द
- नाक बहना या बंद होना
- आंखों से पानी आना
- स्वाद में कमी
- पेट दर्द और अत्यधिक थकान
- सांस के मरीजों के लिए ज्यादा खतरा
डॉ. दीपक अग्रवाल और डीएचएस के डॉ. सुमन सिंह के मुताबिक, जिन्हें पहले से दमा, सांस की तकलीफ या फेफड़ों की बीमारी है, उनके लिए यह फ्लू जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे मरीजों में यह वायरस फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
कैसे फैलता है फ्लू
यह वायरस हवा में मौजूद महीन बूंदों (ड्रॉपलेट्स) के जरिए फैलता है। जब संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता या बात करता है, तो आसपास खड़े लोग आसानी से संक्रमित हो सकते हैं। भीड़भाड़ वाले इलाकों में इसका संक्रमण तेजी से फैलता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह फ्लू हर साल फरवरी मध्य से मार्च मध्य तक चरम पर रहता है।
बचाव के उपाय
- शाम और रात में हल्के गर्म कपड़े पहनें।
- खांसते-छींकते समय मुंह पर रूमाल या मास्क रखें।
- बीमार व्यक्ति दूसरों से दूरी बनाए रखें।
- फास्ट फूड, डिब्बाबंद जूस और फ्रोजन फूड से परहेज करें।
- ताजे फल-सब्जियां और जूस का सेवन करें।
- पर्याप्त पानी पिएं, जरूरत हो तो ओआरएस लें।
- लक्षण दिखने पर खुद दवा लेने की बजाय डॉक्टर से सलाह लें।
- समय पर इलाज न लेने से छोटी बीमारी भी बड़ी समस्या बन सकती है, इसलिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है।