बी.टेक एआईएमएल से लेकर लॉ तक शुरू होंगे नए कोर्स, उत्तराखंड में उच्च शिक्षा को मिली रफ्तार

Edited By Updated: 28 Jul, 2026 10:46 PM

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देहरादून की तुलाज यूनिवर्सिटी को उत्तराखंड सरकार ने स्टेट प्राइवेट यूनिवर्सिटी का दर्जा दे दिया है। यह उत्तराखंड की किसी निजी शिक्षा संस्था के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इस दर्जे के बाद यूनिवर्सिटी अब खुद अपनी डिग्री दे सकेगी। साथ ही नए कोर्स...

देहरादूनः देहरादून की तुलाज यूनिवर्सिटी को उत्तराखंड सरकार ने स्टेट प्राइवेट यूनिवर्सिटी का दर्जा दे दिया है। यह उत्तराखंड की किसी निजी शिक्षा संस्था के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इस दर्जे के बाद यूनिवर्सिटी अब खुद अपनी डिग्री दे सकेगी। साथ ही नए कोर्स भी शुरू कर सकेगी और उद्योग जगत के साथ मिलकर काम भी बढ़ा सकेगी। 2006 में स्थापित इस संस्था को पहले से ही यूजीसी और नैक से ए प्लस मान्यता मिली हुई है। नैक ने इसे चार में से 3.34 अंक दिए हैं। यहां देश के 25 से ज्यादा राज्यों के छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। अब तक 7,000 से ज्यादा पूर्व छात्र देश-विदेश में नौकरी कर रहे हैं।
 
यूनिवर्सिटी के कोफाउंडर और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट रौनक जैन ने कहा कि यह दर्जा 18 साल की मेहनत का नतीजा है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य है कि तुलाज यूनिवर्सिटी उत्तर भारत की ऐसी यूनिवर्सिटी बने, जहां छात्रों को नई तकनीक की चुनौतियों के लिए तैयार किया जाए।
 
एआई कोर्स पर खास जोर
यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने के बाद अब तुलाज यूनिवर्सिटी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीक से जुड़े कोर्स तेजी से बढ़ाएगी। फिलहाल यहां बी.टेक कंप्यूटर साइंस में एआईएमएल, डाटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी और फुल स्टैक डेवलपमेंट की पढ़ाई होती है। इसके अलावा बीसीए और एमसीए में भी एआईएमएल और साइबर सिक्योरिटी जैसे कोर्स चल रहे हैं।

प्रबंधन में एमबीए बिजनेस एनालिटिक्स और एमबीए डिजिटल मार्केटिंग जैसे कोर्स हैं। इस साल से एलएलबी, बीए एलएलबी और बीबीए एलएलबी की पढ़ाई भी शुरू हुई है। इसके अलावा बीएससी एग्रीकल्चर, बी फार्मा, पत्रकारिता और एम.टेक के कोर्स भी उपलब्ध हैं। रौनक जैन ने बताया कि यूनिवर्सिटी चाहती है कि यहां का हर छात्र, चाहे वह इंजीनियर बने, वकील बने या पत्रकार, तकनीक की अच्छी समझ लेकर निकले।
 
शोध और स्टार्टअप में आगे
शोध के मामले में तुलाज यूनिवर्सिटी का रिकॉर्ड मजबूत बताया जा रहा है। अब तक यहां से 2,000 से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं और 30 से ज्यादा पेटेंट भी हैं। सरकार से मान्यता प्राप्त तकनीकी इनक्यूबेटर में 20 से ज्यादा स्टार्टअप काम कर रहे हैं। शोध कार्यों के लिए सरकार से अब तक डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा की मदद मिल चुकी है।

आईआईटी और आईआईएम के साथ यूनिवर्सिटी का शैक्षणिक जुड़ाव इसे उत्तर भारत की बाकी निजी यूनिवर्सिटी से अलग खड़ा करता है। ड्रोन तकनीक पर काम करने के लिए एक विशेष केंद्र भी बनाया गया है।

प्लेसमेंट और कैंपस
प्लेसमेंट के मामले में यहां अब तक 700 से ज्यादा कैंपस भर्ती अभियान चल चुके हैं। 25 से ज्यादा कंपनियों के साथ करार भी है। यूनिवर्सिटी का दावा है कि यहां पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों को व्यावहारिक काम भी सिखाया जाता है, ताकि वे शुरू से ही नौकरी के लिए तैयार रहें।
 
तुलाज यूनिवर्सिटी का 22 एकड़ का आवासीय परिसर देहरादून में स्थित है, जहां वाई-फाई की सुविधा है। यहां 70,000 से ज्यादा किताबों की लाइब्रेरी, फुटबॉल और एथलेटिक्स स्टेडियम, क्रिकेट मैदान, शूटिंग रेंज, योग केंद्र और 24 घंटे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है। एनसीसी और एनएसएस की टुकड़ियां भी यहां सक्रिय हैं। यहां आठ छात्र क्लब और सात तकनीकी सोसाइटी काम करती हैं। छह देशों और 25 से ज्यादा राज्यों के छात्र मिलकर यहां का माहौल बनाते हैं।

स्टेट प्राइवेट यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने के साथ तुलाज यूनिवर्सिटी अब उत्तर भारत की उन गिनी-चुनी यूनिवर्सिटी में शामिल हो गई है, जहां तकनीक, शोध, उद्योग जगत से जुड़ाव और छात्रों का समग्र विकास एक साथ हो रहा है।

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