अगर आप भी सुबह का नास्ता करते हैं स्किप तो हो जाएं सावधान, शरीर को पहुंचा रहे बहुत नुकसान

Edited By Updated: 27 Nov, 2025 09:24 PM

importance of breakfast health risks

एक्सपर्ट्स का कहना है कि रोजाना ब्रेकफास्ट स्किप करना शरीर की नेचुरल रिदम को बिगाड़ देता है और कई अंगों को नुकसान पहुंचाता है। इससे भूख बढ़ती है, वजन बढ़ता है और मेटाबॉलिक सिस्टम प्रभावित होता है। हार्ट, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल पर नकारात्मक असर...

नेशनल डेस्क : सुबह की भागदौड़ में कई लोगों की आदत बन चुकी है कि वे ब्रेकफास्ट को स्किप कर देते हैं। देर से उठना, ऑफिस की जल्दी या बच्चों व घर के कामों में व्यस्तता की वजह से अक्सर लोग भूख लगने तक नाश्ता ही नहीं करते। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह केवल भूख न लगने की समस्या नहीं है, बल्कि शरीर की नेचुरल रिदम को प्रभावित करता है और धीरे-धीरे कई अंगों को नुकसान पहुंचाता है।

ब्रेकफास्ट स्किप करने के सीधे प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार ब्रेकफास्ट स्किप करना सिर्फ एक भोजन छोड़ना नहीं है, बल्कि यह शरीर के पूरे स्ट्रक्चर को प्रभावित करता है। बिना नाश्ते के शरीर लंबे समय तक न्यूट्रिशनल डेफिसिट में रहता है, जिससे दोपहर तक अत्यधिक भूख लगती है। यही भूख बाद में अधिक मात्रा में खाने और हाई कैलोरी फूड चुनने की वजह बनती है, जिससे वजन बढ़ना और पेट में चर्बी जमना शुरू हो जाता है।

हार्मोन और ब्लड शुगर पर असर
ब्रेकफास्ट छोड़ने से भूख बढ़ाने वाला हार्मोन घ्रेलिन अधिक सक्रिय हो जाता है, जिससे मीठा और फैटी फूड खाने की क्रेविंग बढ़ जाती है। इंसुलिन सेंसिटिविटी कम होने लगती है, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल बिगड़ता है। यह पैटर्न ओवरईटिंग, अनियमित एनर्जी लेवल और वजन बढ़ने की मुख्य वजह बन जाता है।

दिल और कोलेस्ट्रॉल पर असर
रिसर्च में यह भी सामने आया है कि जो लोग रोजाना ब्रेकफास्ट स्किप करते हैं, उनमें एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक पाया गया है। बढ़ा हुआ एलडीएल दिल की बीमारियों और हार्ट ब्लॉकेज का कारण बन सकता है। सुबह का नाश्ता न करने से शरीर पर मेटाबॉलिक स्ट्रेस भी बढ़ता है, जिससे लंबे समय में हृदय स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

मेटाबॉलिक सिंड्रोम और डायबिटीज का खतरा
ब्रेकफास्ट स्किप करने की आदत धीरे-धीरे मेटाबॉलिक सिंड्रोम को जन्म देती है। इसमें पेट की चर्बी, हाई बीपी, हाई शुगर और खराब कोलेस्ट्रॉल एक साथ बढ़ते हैं। यह पैटर्न आगे चलकर टाइप 2 डायबिटीज का भी बड़ा खतरा बन जाता है। शोध में पाया गया है कि जो लोग रोजाना नाश्ता नहीं करते, उनमें डायबिटीज का खतरा अधिक होता है।

मानसिक और शारीरिक ऊर्जा पर प्रभाव
सुबह पौष्टिक भोजन न मिलने से शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती। ऐसे लोग जल्दी थकान महसूस करते हैं, चिड़चिड़ा रहते हैं और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई महसूस करते हैं। अस्थिर ब्लड शुगर लेवल मस्तिष्क की कार्यक्षमता को भी प्रभावित करता है।

ऊर्जा और डाइट क्वालिटी पर असर
जब सुबह से दोपहर तक लंबे समय का गैप होता है, तो शरीर ऊर्जा पाने के लिए मीठे, तले और हाई कैलोरी फूड की ओर खिंचाव महसूस करता है। इससे डाइट की क्वालिटी प्रभावित होती है और लंबे समय में वजन, शुगर और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

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