Edited By Khushi,Updated: 13 Mar, 2026 11:01 AM

National Desk: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े संघर्ष का असर अब वैश्विक तेल बाज़ार पर साफ दिखने लगा है। इसी बीच एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि हालिया हालात के कारण रूस को फॉसिल फ्यूल एक्सपोर्ट से भारी कमाई हो रही है।
National Desk: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े संघर्ष का असर अब वैश्विक तेल बाज़ार पर साफ दिखने लगा है। इसी बीच एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि हालिया हालात के कारण रूस को फॉसिल फ्यूल एक्सपोर्ट से भारी कमाई हो रही है।
रूस ने की फॉसिल फ्यूल एक्सपोर्ट से €6 बिलियन की कमाई
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के नए विश्लेषण के मुताबिक, 28 फरवरी को ईरान से जुड़ा संघर्ष शुरू होने के बाद दो हफ्तों से भी कम समय में रूस ने फॉसिल फ्यूल के निर्यात से लगभग 6 अरब यूरो की कमाई की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण वैश्विक तेल बाज़ार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी और तेल की कीमतें ऊपर चली गईं। इसका सीधा फायदा रूस जैसे बड़े ऊर्जा निर्यातकों को मिला।
डेटा के अनुसार, ईरान पर इज़राइल और अमेरिका के हमलों के बाद वाले हफ्ते में रूस का फॉसिल फ्यूल एक्सपोर्ट रेवेन्यू बढ़कर 510 मिलियन यूरो प्रति दिन हो गया। यह फरवरी के औसत दैनिक राजस्व से करीब 14 प्रतिशत ज्यादा है। इससे साफ होता है कि वैश्विक संकट और बाज़ार की अस्थिरता से रूस की कमाई बढ़ रही है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम एशिया में संकट के कारण वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसी बीच खबर है कि ट्रंप प्रशासन रूस के तेल पर लगाए गए प्रतिबंधों में बड़े स्तर पर ढील देने पर विचार कर रहा है।
"रूस पहले से ही इस जियोपॉलिटिकल संकट का फायदा उठा रहा"
पिछले हफ्ते अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने 30 दिन की अस्थायी छूट दी, जिसके तहत भारत को समुद्र में पहले से मौजूद रूसी तेल के कार्गो खरीदने की अनुमति मिल गई। उन्होंने कहा कि यह एक अस्थायी कदम है और इससे रूस की कुल कमाई पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रूस पर लगे प्रतिबंधों में बड़े पैमाने पर ढील दी जाती है तो रूसी तेल पर मिलने वाला डिस्काउंट कम हो सकता है। इससे मॉस्को की कमाई और ज्यादा बढ़ सकती है।
उर्जवाल्ड के सैंक्शन कैंपेनर अलेक्जेंडर किर्क ने कहा कि रूस पहले से ही इस जियोपॉलिटिकल संकट का फायदा उठा रहा है। उनके मुताबिक, ईरान पर हमलों के बाद वाले हफ्ते में रूस का फॉसिल फ्यूल एक्सपोर्ट रेवेन्यू बढ़कर 510 मिलियन यूरो प्रतिदिन पहुंच गया, जो फरवरी के औसत से 14 प्रतिशत ज्यादा है।