‘छात्र आत्महत्याएं’ बनती जा रही गंभीर समस्या!

Edited By Updated: 09 Oct, 2026 03:54 AM

becoming a serious problem

भारत में छात्र-छात्राओं द्वारा आत्महत्याओं की घटनाएं एक गंभीर और चिंताजनक समस्या बन चुकी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा छात्रों की मानसिक  सेहत संबंधी ङ्क्षचताओं को दूर करने और आत्महत्याएं रोकने सम्बन्धी सुझाव देने के लिए गठित ‘नैशनल टास्क फोर्स’...

भारत में छात्र-छात्राओं द्वारा आत्महत्याओं की घटनाएं एक गंभीर और चिंताजनक समस्या बन चुकी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा छात्रों की मानसिक  सेहत संबंधी चिंताओं को दूर करने और आत्महत्याएं रोकने सम्बन्धी सुझाव देने के लिए गठित ‘नैशनल टास्क फोर्स’ (एन.टी.एफ.) ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में इसे ‘सुसाइड एपिडैमिक’ (आत्महत्या की महामारी) करार दिया है। 

इसी सर्वेक्षण के दौरान उच्च शिक्षण संस्थानों के लगभग 15 प्रतिशत छात्रों ने स्वीकार किया कि पिछले 6 महीनों में वे ऐसे दौर से गुजरे, जब उन्होंने स्वयं को अत्यंत परेशान या तनावग्रस्त महसूस किया जबकि 9 प्रतिशत छात्रों ने अपने मन में आत्महत्या के विचार आने की बात कही। सर्वे में ‘राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातक ’ (नीट-यू.जी.) और ‘राष्ट्रीय संयुक्त प्रवेश परीक्षा’ (जे.ई.ई.) रैंक के आधार पर जाति की पहचान तथा दाखिले, अंक निर्धारण, भाषा की दिक्कत और शिक्षकों के ध्यान देने के स्तर पर भेदभाव तथा जाति के कारण अपमान जैसी बातें भी सामने आई हैं। चूंकि कई छात्र आत्महत्या के लिए छत के पंखों का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए आई.आई.टी. मुम्बई ने होस्टलों से छत के पंखे उतरवा कर ‘वाल माऊंटेड’ पंखे लगवाने शुरू कर दिए हैं। छात्रों द्वारा आत्महत्या करने की पिछले लगभग 5 महीनों की मुख्य घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :

* 16 अप्रैल को ‘कुरुक्षेïत्र’ (हरियाणा) के ‘राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान’ (एन.आई.टी.) में बी.टैक के ‘आर्टीफिशियल इंटैलीजैंस एंड डाटा साइंस के दूसरे वर्ष की छात्रा ‘दीक्षा दुबे’ ने होस्टल की तीसरी मंजिल पर स्थित अपने कमरे में पंखे से लटक कर आत्महत्या कर ली। दीक्षा की ‘ए.आई. की पुस्तक के मोड़े हुए एक पेज पर ‘सॉरी मम्मी पापा’ लिखा हुआ मिला। * 14 मई को ‘नीट-यू.जी. 2026’ पेपर लीक विवाद और परीक्षा रद्द होने का पता चलने पर तीसरी कोशिश में डाक्टर बनने का सपना संजोए ‘लखीमपुर खीरी’ के ‘रितिक मिश्रा’ को इतना आघात लगा कि उसने आत्महत्या कर ली। इसके बाद उक्त परीक्षा रद्द होने के विरुद्ध छात्र वर्ग का गुस्सा भड़क उठा तथा उसी महीने लगभग एक दर्जन छात्रों ने आत्महत्या कर ली। 

* 22 अगस्त को ‘आई.आई.टी. दिल्ली कैंपस’ के लैक्चर हॉल कॉम्प्लैक्स की छठी मंजिल से कूदकर एम.एस.सी. फिजिक्स के छात्र ‘ऋषिकेश कुमार’ ने आत्महत्या कर ली।
* 10 सितम्बर को ‘तेलंगाना’ की रहने वाली बी.टैक (एग्रीकल्चर) की छात्रा ‘लक्ष्मी चंद्रा’ ने गल्र्स होस्टल की सातवीं मंजिल से कूद कर जान दे दी।
* 18 सितम्बर को ‘आई.आई.टी. मुम्बई’ के बी.टैक (एनर्जी साइंस) द्वितीय वर्ष के दलित समुदाय के छात्र ‘साहिल वाकोडे’ ने अपने होस्टल के कमरे में आत्महत्या कर ली। 
* 24 सितम्बर को ‘विशाखापट्टनम’ में ‘आंध्र मैडीकल कॉलेज’ (ए.एम.सी.) में जनरल मैडीसिन की पोस्ट ग्रैजुएट अंतिम वर्ष की छात्रा ‘पी. शैलजा’ ने परीक्षा और करियर के तनाव के चलते जान दे दी।
* 28 सितम्बर को ‘विशाखापट्टनम’ में ‘आंध्र मैडीकल कालेज’ में ई.एन.टी. विभाग की प्रथम वर्ष की छात्रा ‘श्रावणी’ ने आत्महत्या कर ली।
* 5 अक्तूबर को आई.आई.टी. ‘दिल्ली’ के ‘बायोकैमिकल इंजीनियरिंग विभाग’ के एक पी.एच.डी. स्कॉलर ‘मनीष आनंद’ की इलाज के दौरान ‘एम्स’ में मौत हो गई। वह कुछ समय पहले अपने किराए के कमरे में गंभीर हालत में पड़ा पाया गया था। 

बताया जाता है कि किसी बात पर तनाव में आ जाने के कारण उसने 18 अगस्त को बड़ी संख्या में नींद की गोलियां खा ली थीं और तभी से वह ट्रॉमा सैंटर के आई.सी.यू. में भर्ती था।  छात्रों द्वारा हताशा में घिर कर आत्महत्या जैसा कदम उठाना  अत्यंत दुखद है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार अक्सर आत्महत्या जैसा कदम उठाने से पहले छात्र कुछ संकेत देते हैं, जिन्हें समझना बेहद जरूरी है। उदाहरण के लिए वे अचानक सबसे अलग-थलग हो जाते हैं तथा अपने मित्रों आदि से दूरी बना लेते हैं। उनके स्वभाव में अत्यंत चिड़चिड़ापन आ जाता है। वे उदास रहने लगते हैं या उन्हें गुस्सा बहुत अधिक आने लगता है। पढ़ाई में उनका प्रदर्शन अचानक बहुत गिर जाता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर छात्रों के अभिभावकों को तुरंत इस ओर ध्यान देना चाहिए। उनकी समस्या का पता लगाने और काऊंसलिंग द्वारा ऐसी मनोदशा से बाहर निकालने के उपाय करने की जरूरत है।-विजय कुमार

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!