‘अमरनाथ यात्रा पर आने वाले कश्मीरी लोगों के हैं मेहमान’ : महबूबा

Edited By Updated: 17 Jun, 2026 03:16 AM

kashmiris coming on amarnath yatra are guests of the people  mehbooba

तीर्थ यात्राएं अनेकता में भारत की एकता की प्रतीक हैं। इन्हीं में एक है जम्मू-कश्मीर में स्थित श्री बाबा अमरनाथ जी की यात्रा जो करोड़ों शिव भक्तों की आस्था का केंद्र है। अमरनाथ यात्रा पर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु ऐसे नि:शस्त्र वीर सैनिक हैं जो...

तीर्थ यात्राएं अनेकता में भारत की एकता की प्रतीक हैं। इन्हीं में एक है जम्मू-कश्मीर में स्थित श्री बाबा अमरनाथ जी की यात्रा जो करोड़ों शिव भक्तों की आस्था का केंद्र है। अमरनाथ यात्रा पर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु ऐसे नि:शस्त्र वीर सैनिक हैं जो यहां देश की एकता-अखंडता मजबूत करने और इसकी रक्षा का संकल्प लेकर आते हैं और यह संख्या हर वर्ष बढ़ती जा रही है। श्री अमरनाथ की पवित्र गुफा की पुनर्खोज ‘बूटा मोहम्मद’ नामक एक नेक दिल मुसलमान गुज्जर ने की थी और यहां चढ़ाए जाने वाले चढ़ावे का एक हिस्सा आज भी ‘बूटा मोहम्मद’ के परिजनों को दिया जाता है।

भारत की यह सबसे बड़ी धार्मिक यात्रा जम्मू-कश्मीर के सभी धर्मों के लोगों को एक भावात्मक बंधन में बांधने व भाईचारा मजबूत करने और यहां के घोड़े, पिट्ठू व पालकी वालों, शिकारा चलाने वालों और होटल मालिकों की कमाई का साधन भी है। मुख्यत: इस यात्रा से होने वाली आय से ही यहां के लोग अपने बेटे-बेटियों के शादी-विवाह, नए मकानों का निर्माण तथा खरीदारी आदि करते हैं। इससे जम्मू-कश्मीर सरकार को भी करोड़ों रुपयों की आय होती है। इस वर्ष यह यात्रा 3 जुलाई को शुरू होकर 57 दिनों के बाद 28 अगस्त को सम्पन्न होगी तथा इस दौरान श्रद्धालु अनंतनाग जिले के पारंपरिक 48 किलोमीटर लम्बे ‘नुनवान-पहलगाम मार्ग’ के अलावा ‘गांदरबल’ जिले के 14 किलोमीटर लम्बे ‘बालटाल मार्ग’ का उपयोग करेंगे। 

गृह मंत्री अमित शाह ने इस यात्रा में सुरक्षा प्रबंधों सम्बन्धी नई दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में यात्रा मार्ग के अलावा प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। 
इसके लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अत्याधुनिक जांच, स्क्रीनिंग व अन्य उपकरण भी तैनात किए हैं। इनमें पोर्टेबल जैमर, डीप सर्च मैटल डिटैक्टर, विस्फोटक और तरल विस्फोटक डिटैक्टर, नॉन-लीनियर जंक्शन डिटैक्टर (एन.एल.जे.डी.) आदि शामिल हैं।
वर्ष 2000 में अमरनाथ यात्रा पर हुए आतंकवादी हमले में लगभग 105  श्रद्धालु मारे गए थे जबकि 2001 में ‘शेषनाग कैंप’ में हुए हमले में 13 श्रद्धालुओं की जान गई थी। इसी प्रकार 2002 में 9 और 2017 में हुए आतंकवादी हमले में 8 श्रद्धालु मारे गए थे। 
इन्हीं आतंकवादी हमलों के दृष्टिïगत ‘पीपुल्स डैमोक्रेटिक पार्टी’ (पी.डी.पी.) की अध्यक्ष तथा जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पहलगाम में पार्टी कार्यकत्र्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि :

‘‘अमरनाथ यात्रा भारत में कश्मीर के विषय में फैली घृणा और अविश्वास को समाप्त करने का एक अवसर है। इस यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल सुरक्षा बलों की ही नहीं, बल्कि यह समूचे कश्मीर के लोगों का भी सामूहिक कत्र्तव्य है। अमरनाथ की यात्रा पर देश के ओर-छोर से आने वाले श्रद्धालु कश्मीरी लोगों के मेहमान हैं।’’
‘‘यहां से विदा होते हुए वे भारतवर्ष के कोने-कोने में जम्मू-कश्मीर की सरजमीं, जम्मू-कश्मीर के लोगों और हमारे नैतिक मूल्यों की कहानी अपने साथ लेकर जाते हैं। अत: इस बात को सुनिश्चित करना हमारा कत्र्तव्य है कि अमरनाथ की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु यहां के लोगों के प्यार, सौहार्द और अतिथि सत्कार की गरमाहट भरी यादें अपने साथ लेकर जाएं।’’ 
‘‘प्रत्येक श्रद्धालु के साथ सही अर्थों में मानवता की भावना के साथ व्यवहार द्वारा ही कश्मीर तथा मुसलमानों के विरुद्ध गलतफहमियों का मुकाबला किया जा सकता है। इस यात्रा की तहेदिल से सुरक्षा और समर्थन करके ही हम कश्मीर के लोगों में व्याप्त कश्मीरियत की भावना को व्यक्त कर सकते हैं।’’ अमरनाथ यात्रा बारे महबूबा मुफ्ती के उक्त उद्गार किसी टिप्पणी के मोहताज नहीं हैं। आशा है कि इस वर्ष भोले बाबा के धाम की यह यात्रा पहले की अपेक्षा अधिक सफलता से सम्पन्न होगी।—विजय कुमार

Related Story

    Trending Topics

    img title
    img title

    Be on the top of everything happening around the world.

    Try Premium Service.

    Subscribe Now!