Mercedes-Benz के ग्लोबल टॉप-15 बाजारों में भारत हुआ शामिल, अल्ट्रा-लक्ज़री 'Maybach' के लिए बना दुनिया का 5वां सबसे बड़ा देश

Edited By Updated: 18 Jun, 2026 02:26 PM

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मशहूर जर्मन कार निर्माता मर्सिडीज-बेंज Mercedes-Benz के लिए भारतीय बाजार एक नया माइलस्टोन स्थापित कर रहा है। इतिहास में पहली बार भारत इस लक्ज़री कार कंपनी के दुनिया भर के शीर्ष 15 बाजारों की सूची में शामिल हो गया है। इतना ही नहीं, मर्सिडीज की सबसे...

नेशनल डेस्क: मशहूर जर्मन कार निर्माता मर्सिडीज-बेंज Mercedes-Benz के लिए भारतीय बाजार एक नया माइलस्टोन स्थापित कर रहा है। इतिहास में पहली बार भारत इस लक्ज़री कार कंपनी के दुनिया भर के शीर्ष 15 बाजारों की सूची में शामिल हो गया है। इतना ही नहीं, मर्सिडीज की सबसे आलीशान और अल्ट्रा-लक्ज़री सीरीज 'मायबाक' (Maybach) की बिक्री के मामले में भारत अब दुनिया के टॉप 5 देशों में शुमार हो चुका है। कंपनी के बोर्ड मेंबर (सेल्स और कस्टमर एक्सपीरियंस) मैथियास गीसेन ने साल 2026 को कंपनी के लिए "बदलाव का साल" करार दिया है। मर्सिडीज वैश्विक स्तर पर 40 नए मॉडल्स बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा भारतीय बाजार में भी पेश किया जाएगा। वर्तमान में कंपनी भारत में ही अपनी 11 गाड़ियों की असेंबलिंग करती है।

भारतीय बाजार में ग्रोथ की संभावनाएं

भारत में फिलहाल हर साल करीब 50,000 लक्ज़री कारों की बिक्री होती है, जिसमें से अकेले मर्सिडीज-बेंज लगभग 20,000 गाड़ियाँ बेचती है। हालांकि, भारत में आम गाड़ियों (सालाना 42 लाख से अधिक की बिक्री) और प्रीमियम लक्ज़री सेगमेंट के बीच एक बहुत बड़ा फासला है, लेकिन यही फासला आगे बढ़ने के बेहतरीन मौके भी देता है। मैथियास गीसेन के अनुसार, भारतीयों की बढ़ती आमदनी, युवा खरीदारों की बड़ी तादाद और लग्जरी लाइफस्टाइल व स्टेटस सिंबल के प्रति बढ़ता आकर्षण इस बाजार को रफ्तार दे रहा है।

मर्सिडीज इस बदलते दौर का भरपूर फायदा उठा रही है। भारत में कंपनी की कुल बिक्री का लगभग 25% हिस्सा उसकी सबसे महंगी और टॉप-एंड गाड़ियों से आता है, जो कि कंपनी के 15% के वैश्विक औसत से भी कहीं ज्यादा है। कंपनी अपनी इस पकड़ को और मजबूत करने के लिए नई प्लग-इन हाइब्रिड S-क्लास (जिसे इसी हफ्ते भारत में लॉन्च किया गया है) और GLS जैसी फ्लैगशिप कारों के साथ-साथ VLS ग्रैंड लिमोसिन जैसे नए मॉडल भी जोड़ रही है। कंपनी की रणनीति एंट्री-लेवल से लेकर हाई-एंड लक्ज़री तक कारों की एक ऐसी सीरीज तैयार करने की है, जिससे नए ग्राहक शुरुआत में ही ब्रांड से जुड़ें और आगे चलकर उसी के प्रीमियम मॉडल पर अपग्रेड हों।

वैश्विक बाजार में EV ट्रांजिशन का असर

भारतीय बाजार में शानदार प्रदर्शन के बीच, मर्सिडीज-बेंज का वैश्विक परिदृश्य थोड़ा चुनौतीपूर्ण रहा है। गीसेन ने साफ किया कि पिछले साल कंपनी के ग्लोबल सेल्स वॉल्यूम में आई गिरावट का मुख्य कारण इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की ओर बढ़ता झुकाव है। इसका सबसे बड़ा असर चीन में देखने को मिल रहा है, जहाँ इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ बहुत तेजी से पारंपरिक कारों के मार्केट शेयर पर कब्जा कर रही हैं।

 

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