छठ पूजा और भारतीय संस्कृति

Edited By Updated: 28 Oct, 2022 06:04 AM

chhath puja and indian culture

‘भारत कोई भूमि का टुकड़ा नहीं है, यह जीता जागता राष्ट्रपुरुष है। यह वंदन की धरती है, यह अभिनंदन की भूमि है। यह अर्पण की भूमि है यह तर्पण की भूमि है। इसकी नदी-नदी हमारे लिए गंगा है, इसका

‘भारत कोई भूमि का टुकड़ा नहीं है, यह जीता जागता राष्ट्रपुरुष है। यह वंदन की धरती है, यह अभिनंदन की भूमि है। यह अर्पण की भूमि है यह तर्पण की भूमि है। इसकी नदी-नदी हमारे लिए गंगा है, इसका कंकर-कंकर हमारे लिए शंकर है। परम श्रद्धेय स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की यह पंक्तियां अमर हैं। 

यह मात्र पंक्तियां नहीं अपितु भारत के प्रत्येक नागरिक के हृदय की अभिव्यक्ति है। सनातन संस्कृति का यह देश आदिकाल से राष्ट्र भूमि के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर देने वालों की भूमि रहा है। हमारी संस्कृति ने हमें इंसान के साथ जीव जंतु, पेड़ पौधे, सूर्य, चंद्रमा, पृथ्वी और आकाश सभी की आराधना करना सिखाया है। हम पृथ्वी को मां मानते हैं और प्रकृति को माता पृथ्वी का शृंगार। इसी महान प्रकृति के उपासना का पर्व है महापर्व छठ। 

सूर्य उपासना एवं लोक आस्था के महापर्व छठ को हम सिर्फ त्यौहार नहीं अपितु अपना संस्कार मानते हैं। 4 दिनों तक चलने वाली छठ पूजा में हम सूर्य, छठी मैया, ऊषा, संध्या, रात्रि, वायु, जल एवं प्रकृति के अन्य महत्वपूर्ण चीजों की पूजा करते हैं। प्रकृति ने हमें जीने के लिए वातावरण के साथ-साथ बहुत सी खूबसूरत चीजें प्रदान की हैं। छठ पूजा में जहां एक ओर हम शुद्धता और पवित्रता की तैयारी करते हैं तो वहीं दूसरी ओर एकता और अखंडता का भी पूरा ख्याल रखते हैं। जिस प्रकार सूर्य की किरणें इंसान तक पहुंचने में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करतीं ठीक उसी प्रकार छठ व्रत भी हमें सभी प्रकार के भेदभाव को त्यागने का संदेश देता है। 

छठ पर्व न सिर्फ समाज को एक करता है अपितु आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में पूरे परिवार को भी एकत्रित करने का काम छठ महापर्व कर रहा है। आज के समय में नौकरी एवं रोजगार की वजह से परिवार के विभिन्न सदस्य भारत एवं विश्व के अलग-अलग शहरों में जीवन यापन कर रहे हैं परंतु छठ आते ही सभी अपने घरों की ओर लौट चलते हैं। यह छठ पूजा की शक्ति है जो हमें इस संस्कार में पिरोए हुए है। 

राष्ट्रवाद के पुनर्जागरण का पर्व छठ : किसी राष्ट्र को मजबूत करने में विचारधारा का अहम योगदान होता है। यूं तो समाज में कई विचारधाराएं पनपती हैं और खत्म हो जाती हैं परंतु राष्ट्रवाद एक ऐसी विचारधारा है जो युग युगांतर से चली आ रही है। जब-जब राष्ट्रवाद कमजोर पड़ा है तब-तब हमारा समाज बिखरा है और समाज को पुन: जागृत करने के लिए राष्ट्रवाद ने अहम भूमिका निभाई है। 

यूं तो राष्ट्रवाद की कई परिभाषाएं हैं एवं अलग-अलग लोगों के लिए इसके मायने भी विभिन्न हो सकते हैं परंतु जो विचारधारा लोगों की संस्कृति एवं प्रकृति के प्रति जागरूक एवं जिम्मेदार बनाए उससे बड़ा राष्ट्रवाद शायद कुछ और नहीं हो सकता। अगर हम छठ पूजा के महत्व को समझें तो हम पाएंगे कि छठ पूजा भी राष्ट्रवाद को मजबूत करने का पर्व है। छठ पूजा लोगों के अंदर संस्कार एवं विचारों का संचार करती है जिससे समाज पुन: जागृत होता है। छठ पूजा हमें पवित्र, सशक्त, प्रतिबंध एवं जिम्मेदार बनाती है। ये सभी पहलू राष्ट्रवाद के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।-श्याम जाजू (निवर्तमान राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भाजपा)

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