‘मनरेगा’ को लेकर कांग्रेस का मोदी सरकार पर हमला

Edited By Updated: 24 Jan, 2026 05:52 AM

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा मनरेगा को खत्म करना महात्मा गांधी का नाम लोगों की याद से मिटाने की कोशिश है और उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी संसद के आने वाले बजट सत्र में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएगी।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा मनरेगा को खत्म करना महात्मा गांधी का नाम लोगों की याद से मिटाने की कोशिश है और उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी संसद के आने वाले बजट सत्र में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएगी। दूसरी ओर, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी रचनात्मक कांग्रेस द्वारा आयोजित राष्ट्रीय मनरेगा मजदूर सम्मेलन को संबोधित किया और यू.पी.ए.-काल की मनरेगा की जगह लाई गई केंद्र की नई वी.बी. जी-राम-जी योजना को एक दिखावा और गरीबों के अधिकारों पर हमला बताया। तीन कृषि कानूनों का जिक्र करते हुए, जिनके कारण बड़े पैमाने पर किसानों का विरोध-प्रदर्शन हुआ और जिन्हें आखिरकार वापस ले लिया गया, राहुल गांधी ने कहा कि मजदूरों पर भी इसी तरह का हमला करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, कांग्रेस ने 10 जनवरी को यू.पी.ए.-काल के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को खत्म करने के खिलाफ ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ नाम से 45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया। 

नबीन की टीम में युवा चेहरे होने की उम्मीद : नितिन नबीन द्वारा भारतीय जनता पार्टी की कमान संभालने के बाद आने वाले दिनों में राष्ट्रीय टीम का पुनर्गठन होने की उम्मीद है। नबीन ने पार्टी के पदाधिकारियों और इसके विभिन्न विंगों के प्रमुखों के साथ एक बैठक की और जाहिर तौर पर पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुड्डुचेरी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों की चुनावी रणनीति पर चर्चा की। हालांकि, नबीन ने कई संगठनात्मक नियुक्तियां भी कीं, जिनमें पार्टी महासचिव विनोद तावड़े को केरल विधानसभा चुनावों का चुनाव प्रभारी और राम माधव को ग्रेटर बेंगलुरु नगर निगम चुनावों का प्रभारी बनाया गया। हर अध्यक्ष के साथ पदाधिकारियों की एक नई टीम बनती है। नबीन की टीम में युवा चेहरे होने की उम्मीद है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि नबीन का पार्टी अध्यक्ष बनना, भाजपा के संगठनात्मक ढांचे पर नरेंद्र मोदी और अमित शाह की बढ़ती पकड़ को और पुख्ता करता है।

पंजाब कांग्रेस में गुटबंदी तेज : पंजाब में विधानसभा चुनावों में सिर्फ एक साल बचा है, ऐसे में अमरिंदर सिंह राजा वडिंग़, चरणजीत सिंह चन्नी और प्रताप सिंह बाजवा के बीच गुटबाजी की लड़ाई और बढ़ गई है। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी सहित वरिष्ठ नेताओं को सार्वजनिक रूप से बयान देने के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी और कहा कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, विपक्ष के नेता राहुल गांधी, महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल और प्रभारी भूपेश बघेल ने पंजाब के नेताओं जैसे प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की। यह बैठक चन्नी, जो एक दलित सिख हैं, के उस दावे के कुछ दिनों बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि जाट सिख पार्टी पर हावी हैं और दलितों को उनका हक नहीं मिल रहा। इस पर वडिंग़ ने पलटवार करते हुए कहा था कि उन्हें मुख्यमंत्री, सांसद और कांग्रेस कार्य समिति का सदस्य बनाया गया था।

लालू छोड़ सकते हैं राजद अध्यक्ष पद : बिहार के राजनीतिक गलियारों में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। लगातार खराब स्वास्थ्य को लेकर चिंताओं के बीच, पार्टी के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद 28 साल तक कमान संभालने के बाद पद छोडऩे का फैसला कर सकते हैं और तेजस्वी यादव को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त कर सकते हैं। यह फैसला 25 जनवरी को होने वाली राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक में लिए जाने की उम्मीद है। राजद कार्यकत्र्ताओं का एक और वर्ग कथित तौर पर यह राय रखता है कि यह पद 9 भाई-बहनों में सबसे बड़ी और पाटलीपुत्र से मौजूदा लोकसभा सांसद मीसा भारती को दिया जाना चाहिए। राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर वरिष्ठ नेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपने सहित कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने की संभावना है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान तोडफ़ोड़ के आरोपी नेताओं के खिलफ कार्रवाई पर भी चर्चा हो सकती है। डॉक्टरों ने लालू प्रसाद को आराम करने और तनाव से बचने की सलाह दी है, जिसके कारण वह सक्रिय राजनीतिक मामलों में सीमित भूमिका ही निभा पाए हैं। इस स्थिति में, पार्टी नेताओं का मानना है कि संगठन के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए एक कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति आवश्यक हो गई है।-राहिल नोरा चोपड़ा
 

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