लड़ाकू विमान अपग्रेड : भारत का वायु रक्षा में क्रांतिकारी कदम

Edited By Updated: 15 Mar, 2026 02:52 AM

fighter jet upgrades india s revolutionary step in air defense

उन्नत माध्यमिक लड़ाकू विमान (AMCA) को 5.5वीं और छठी पीढ़ी में अपग्रेड करना भारत की रक्षा क्षमताओं में एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। हाल के वर्षों में, भारत ने अपनी वायु सेना को मजबूत बनाने के लिए स्वदेशी तकनीकों पर जोर दिया है। ‘एमका’ कार्यक्रम इस...

उन्नत माध्यमिक लड़ाकू विमान (AMCA) को 5.5वीं और छठी पीढ़ी में अपग्रेड करना भारत की रक्षा क्षमताओं में एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। हाल के वर्षों में, भारत ने अपनी वायु सेना को मजबूत बनाने के लिए स्वदेशी तकनीकों पर जोर दिया है। ‘एमका’ कार्यक्रम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। 2026 तक, ‘एमका’ को 5.5वीं पीढ़ी और आगे छठी पीढ़ी के स्तर तक अपग्रेड करने की योजना ने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। इस योजना के तहत, नई स्टैल्थ तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) के उपयोग पर जोर दिया गया है। सवाल उठता है कि क्या यह भारत की वैश्विक वायु क्षेत्र में स्थिति को कैसे मजबूत करेगा और क्या यह अमरीका तथा चीन से मुकाबला करने में सक्षम होगा?

‘एमका’ कार्यक्रम की शुरुआत 2011 में हुई थी, जब रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डी.आर.डी.ओ.) की एयरोनॉटिकल डिवैल्पमैंट एजैंसी (ADA) ने 5वीं पीढ़ी के स्टैल्थ फाइटर जैट विकसित करने का फैसला किया। उल्लेखनीय है कि ‘एमका’ एक ट्विन-इंजन, सिंगल-सीट विमान है, जिसका वजन लगभग 27 टन है और यह मैक 2.15 की गति से उड़ान भर सकता है। एम.के.1 संस्करण जी.ई. एफ-414 इंजन का उपयोग करेगा, जबकि एम.के.2 को 110-120 के.एन. थ्रस्ट वाले नए इंजन से लैस किया जाएगा, जो फ्रांस की साफरान या अन्य सांझेदारों के साथ सह-विकसित होगा।

2026 तक, ‘एमका’ एम.के.2 को 5.5वीं पीढ़ी का दर्जा दिया जा रहा है, जिसमें छठी पीढ़ी की विशेषताएं जैसे ए.आई. संचालित इलैक्ट्रॉनिक पायलट और प्रेडिक्टिव मेंटेनैंस शामिल हैं। इसका प्रोटोटाइप रोलआऊट 2028 के अंत तक और पहली उड़ान 2029 में होने की उम्मीद है, जबकि इंडक्शन 2035 तक हो सकता है। यह अपग्रेड भारत को अमरीका, रूस और चीन जैसे देशों की श्रेणी में खड़ा करेगा, जो 5वीं पीढ़ी के विमान संचालित करते हैं। जानकारों का मानना है कि ‘एमका’ में अपनाई जा रही नई स्टैल्थ तकनीक भारत की वायु रक्षा को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करेगी। स्टैल्थ का मतलब है राडार से बचाव, जो विमान को दुश्मन की नजरों से छिपा कर रखता है। ‘एमका’ में डाइवर्टरलैस सुपरसोनिक इनलेट (DSI), सर्पेंटाइन एयर इनटेक डक्ट और उन्नत राडार-एब्जॉर्बेंट मैटीरियल्स का उपयोग किया जा रहा है। ये विशेषताएं राडार सिग्नेचर को न्यूनतम करती हैं, जिससे विमान दुश्मन के वायु रक्षा सिस्टम को भेद सकता है। यह तकनीक ‘एमका’ को चीनी जे-20 या अमरीकी एफ-35 जैसे विमानों से बेहतर छिपाव प्रदान करेगी।

गौरतलब है कि ‘एमका’ में ‘इलैक्ट्रॉनिक पायलट’ नामक ए.आई.-सिस्टम होगा, जो पायलट के साथ सहयोगी की भूमिका निभाएगा। यह ए.आई. खतरे का पता लगाने, रूट ऑप्टिमाइजेशन, कॉम्बैट स्ट्रैटेजी और मिशन प्लानिंग में मदद करेगा। इसके अलावा, ए.आई.-आधारित प्रेडिक्टिव मेंटेनैंस से विमान की उपलब्धता दर 75 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी, जो वर्तमान विमानों से कहीं अधिक है। सैंसर फ्यूजन और नैटवर्क-सैंट्रिक वारफेयर सिस्टम ‘एमका’ को ड्रोन स्वाम्र्स और अन्य प्लेटफॉम्र्स के साथ एकीकृत करेगा। यह छठी पीढ़ी की दिशा में कदम है, जहां ए.आई. स्वायत्त निर्णय लेने में सक्षम होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह अपग्रेड भारत की वायु सेना को आधुनिक युद्धों में बढ़त देगा, जहां ए.आई. और स्टैल्थ निर्णायक कारक हैं।

रक्षा विशेषज्ञ यह सवाल भी उठा रहे हैं कि इस अपग्रेड से भारत की वैश्विक वायु क्षेत्र में स्थिति कैसे सुधरेगी? यह स्वदेशी तकनीक पर निर्भरता बढ़ाएगा, जो आयात पर निर्भरता कम करेगा। वर्तमान में, भारतीय वायु सेना में स्क्वाड्रन की कमी है और ‘एमका’ इस कमी को पूरा करेगा। स्टैल्थ और ए.आई. से लैस ‘एमका’ भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मजबूत डिटरैंस प्रदान करेगा। चीन के साथ सीमा विवादों में ‘एमका’ जे-20 का मुकाबला कर सकेगा, जो वर्तमान में भारत के लिए चुनौती है। पाकिस्तान के चीनी जे-10 या जे.एफ.-17 के खिलाफ भी यह श्रेष्ठ होगा। वैश्विक स्तर पर, ‘एमका’ भारत को क्वाड (भारत, अमरीका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) जैसे गठबंधनों में मजबूत भागीदार बनाएगा। यह एशिया में पावर बैलेंस को भारत के पक्ष में झुका सकता है, क्योंकि यह चौथा देश होगा, जो स्वदेशी 5वीं पीढ़ी का विमान विकसित करेगा।

उल्लेखनीय है कि अमरीका के एफ-22 और एफ-35 परिपक्व तकनीक वाले लड़ाकू विमान हैं, जिनमें दशकों का अनुभव है। ‘एमका’ की स्टैल्थ और ए.आई. विशेषताएं एफ-35 से तुलनीय हैं लेकिन उत्पादन और संचालन अनुभव की कमी एक कमजोरी है। हालांकि, ‘एमका’ की लागत कम होगी और यह भारत की विशिष्ट जरूरतों के अनुरूप होगा। वहीं चीन के जे-20 के खिलाफ ‘एमका’ की उन्नत स्टैल्थ और ए.आई. बढ़त दे सकती है, खासकर एल.ए.सी. पर, जहां जे-20 की संख्या अधिक है, लेकिन ‘एमका’ की ए.आई. एकीकरण से भारत गुणवत्ता में आगे निकल सकता है। 

दावा है कि छठी पीढ़ी की ओर अपग्रेड से ‘एमका’ अमरीका के ‘नैक्स्ट जैनरेशन एयर डोमिनैंस’ (NGAD) या चीनी छठी पीढ़ी कार्यक्रमों से मुकाबला अवश्य कर सकेगा। लेकिन वहीं इस परियोजना में चुनौतियां भी हैं। जैसे कि इंजन विकास में देरी, फंडग की कमी और समयसीमा का पालन। इसलिए यदि ‘एमका’ को एक सफल परियोजना बनाना है तो सरकार को समय पर फंडिंग और अंतर्राष्ट्रीय सांझेदारियां सुनिश्चित करनी चाहिए।-रजनीश कपूर 

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