Edited By ,Updated: 29 Apr, 2026 05:10 AM

उन्होंने मई 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के लिए भारत की अपनी पहली यात्रा की, ताकि उस बाजार में एप्पल की पहुंच बढ़ाने के तरीकों का पता लगाया जा सके, जहां उसकी उपस्थिति सीमित थी। लेकिन एप्पल इंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिम कुक को...
उन्होंने मई 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के लिए भारत की अपनी पहली यात्रा की, ताकि उस बाजार में एप्पल की पहुंच बढ़ाने के तरीकों का पता लगाया जा सके, जहां उसकी उपस्थिति सीमित थी। लेकिन एप्पल इंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिम कुक को जल्द ही एहसास हो गया कि आगे का रास्ता आसान नहीं होगा। उन्होंने अमरीका, ब्रिटेन और संयुक्त अरब अमीरात के शीर्ष अधिकारियों की टीमें भारतीय सरकार के समक्ष भेजीं, ताकि वे देश में फोन असैंबल करने के लिए आवश्यक शर्तों को प्रस्तुत कर सकें, विशेष रूप से तब, जब नवीनीकृत आईफोन के आयात और बिक्री की अनुमति देने का उनका प्रारंभिक प्रस्ताव सिरे से खारिज कर दिया गया था।
हालांकि, सरकार को मनाने का प्रयास विफल रहा। प्रस्ताव में भारत में आईफोन के निर्माण की शर्त के रूप में स्मार्टफोन के लिए पूंजीगत उपकरण, पुर्जे और उपभोग्य सामग्रियों के साथ-साथ सेवा और मुरम्मत पर 15 वर्षों की अवधि के लिए शुल्क छूट की मांग शामिल थी। 9 साल बाद, जब कुक ने अपने पद से हटने की घोषणा की, तो वैश्विक स्तर पर असैंबल किए गए हर 4 आईफोन में से 1 भारत में निर्मित हुआ, जबकि 2016 में 95 प्रतिशत आईफोन चीन में उत्पादित हुए थे। भारत अमरीका को आईफोन निर्यात करने वाले सबसे बड़े देशों में से एक बन गया है। मोबाइल उपकरणों के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पी.एल.आई.) योजना (वित्त वर्ष 2022 से वित्त वर्ष 2026) के 5 वर्षों में, देश ने कुल 70 अरब डॉलर के माल ढुलाई मूल्य वाले आईफोन का उत्पादन किया है। इतना ही नहीं, एप्पल ने अपने पी.एल.आई. उत्पादन लक्ष्यों को मूल्य के हिसाब से 80 प्रतिशत से अधिक पार कर लिया है, जिससे इलैक्ट्रॉनिक्स भारत से निर्यात की जाने वाली तीसरी सबसे बड़ी श्रेणी बन गई है।
2018 तक, एप्पल ने अमरीकी नेतृत्व वाली रणनीति से हटकर सरकारी प्राथमिकताओं के अनुरूप स्थानीय विशेषज्ञों की एक टीम बनाने का निर्णय लिया। साथ ही, उसने मोबाइल कंपनियों व इलैक्ट्रॉनिक्स उद्योग संघों के साथ मिलकर काम करने का विकल्प भी चुना। यह रणनीति कारगर साबित हुई। 3 साल की कठिन बातचीत के बाद, एकल-ब्रांड खुदरा बिक्री के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ.डी.आई.) नियमों में संशोधन किया गया। एप्पल ने सरकार को यह विश्वास दिलाया कि चूंकि वह सीधे फोन का निर्माण नहीं करती, इसलिए उसके संविदा निर्माताओं द्वारा किए गए मूल्यवर्धन को ‘स्थानीय सोॄसग’ में गिना जाना चाहिए। इसके बदले में, एप्पल ने सरकार को आश्वासन दिया कि वह ऐसी अनुचित मूल्य निर्धारण नीतियों में शामिल नहीं होगी, जिससे स्थानीय खुदरा विक्रेताओं को नुकसान हो। भारत में उसका पहला खुदरा स्टोर 2023 में मुंबई में खुला।
समय भी एप्पल के पक्ष में रहा। सरकार द्वारा 2019 में आत्मनिर्भर भारत के लिए किए गए प्रयास और पी.एल.आई. योजना के माध्यम से उद्योग को दिए गए समर्थन का समय एप्पल द्वारा चीन पर अपनी भारी निर्भरता को कम करने के प्रयासों के साथ मेल खाता था। हालांकि एप्पल के वियतनाम में वियरेबल और आईपैड्स के लिए विनिर्माण केंद्र थे लेकिन सैमसंग ने अरबों डॉलर के निवेश के साथ पहले ही वहां के स्मार्टफोन बाजार पर अपना दबदबा बना लिया था। इसलिए एप्पल ने भारत को अपने वैकल्पिक विनिर्माण गंतव्य के रूप में चुना। कुक ने उन वैश्विक चुनौतियों का भी सामना किया जिनसे भारत में कंपनी की प्रगति बाधित हो सकती थी। एक बड़ी चुनौती ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के दौरान आई, जब उन्होंने एप्पल पर आईफोन का निर्माण भारत की बजाय अमरीका में करने का दबाव डाला और दंडात्मक टैरिफ लगाने का संकेत दिया। वर्तमान में, भारत से अमरीका में आयात पर कोई शुल्क नहीं लगता। कुक द्वारा अमरीका में अतिरिक्त 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताने के बाद यह मुद्दा सुलझ गया, जिससे कुल निवेश 600 अरब डॉलर हो गया। इसके बदले में, ट्रम्प ने वादा किया कि एप्पल पर आयातित चिप्स और सैमीकंडक्टरों पर उच्च शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
कुक ने शुल्क अंतर का लाभ उठाने में भी तत्परता दिखाई। उन्होंने वित्त वर्ष 2026 में भारत से अमरीका को आईफोन का निर्यात बढ़ाया और चीन से उत्पादन क्षमता को भारत की ओर स्थानांतरित किया। चीन की तुलना में भारत को शून्य शुल्क का लाभ प्राप्त था, जहां आयात पर फेंटानिल से संबंधित 20 प्रतिशत शुल्क लगता था। परिणामस्वरूप, अप्रैल-जनवरी के दौरान एप्पल के नेतृत्व में अमरीका को स्मार्टफोन का निर्यात 137 प्रतिशत बढ़कर 15.87 बिलियन डॉलर हो गया, जिससे यह अमरीका को भारत की सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बन गई। हालांकि, अमरीकी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा फेंटानिल पर शुल्क समाप्त किए जाने के बाद, चीन के मुकाबले भारत का यह लाभ अब समाप्त हो गया है। इससे कई सवाल उठते हैं। क्या अमरीका को होने वाले निर्यात में कमी आएगी या निर्यात फिर से चीन की ओर मुड़ जाएगा? और क्या इसके साथ ही भारत में आईफोन के उत्पादन की तीव्र वृद्धि धीमी पड़ जाएगी? या क्या भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक आईफोन उत्पादन का 30 प्रतिशत असैंबल करने के सरकार के लक्ष्य को हासिल कर पाएगा।-सुरजीत दास गुप्ता