आधुनिक दौर में रावण का जलाया जाना कितना प्रासंगिक?

Edited By Updated: 19 Oct, 2026 05:28 AM

how relevant is the burning of ravana in modern times

प्रश्न यह नहीं है कि रावण कितने वर्षों से जल रहा है? प्रश्न यह है कि वास्तव में जिस रावण को राम ने मारा, वह मर गया है? अगर वास्तव में रावण को मार दिया गया तो फिर हर वर्ष मरे हुए रावण को क्यों मारा जाता है? क्या रावण का दहन केवल मात्र प्रतीकात्मक बन...

प्रश्न यह नहीं है कि रावण कितने वर्षों से जल रहा है? प्रश्न यह है कि वास्तव में जिस रावण को राम ने मारा, वह मर गया है? अगर वास्तव में रावण को मार दिया गया तो फिर हर वर्ष मरे हुए रावण को क्यों मारा जाता है? क्या रावण का दहन केवल मात्र प्रतीकात्मक बन गया है? महाज्ञानी एवं तपस्वी रावण इसलिए मरता है क्योंकि वह इच्छाओं से भरा है, जबकि राम इच्छाओं से मुक्त हैं। 

राम मनुष्यता पर राज करते हैं जबकि रावण मनुष्यों पर राज करता है। राम के पास जो है वह पर्याप्त है और रावण के पास पर्याप्त भी अपर्याप्त है। रामेश्वरम की स्थापना के लिए शैव और वैष्णव दोनों विधाओं से संपन्न रावण को पुरोहित के रूप में बुलाने के लिए जामवंत जब लंका जाते हैं, तो यह जानते हुए भी कि इस यज्ञ के यजमान उसके शत्रु राम हैं और रामेश्वरम की स्थापना का प्रयोजन लंका जीत है, रावण राम का पुरोहित बनकर विजयी भव का आशीर्वाद देता है। 

संस्कारों की पराकाष्ठा उस समय देखते ही बनती है जब दक्षिणा देने पर अड़े राम से रावण अपने अंतिम समय में दोनों यजमानों राम और लक्ष्मण को अपनी नजरों के सामने होने की इच्छा प्रकट करता है। नीति को जीता हुआ रावण 10 महीने लंका में रही मां सीता को स्पर्श तक करने में परहेज करता है। यह वही रावण है जिसके तेज के बल पर कैलाश की हलचल भी वैद्यनाथ के रूप में देखी जा सकती है और जो कुबेर तक को धरा पर खींच कर ले आने का साहस रखता है। अगर सच में रावण मात्र सीता के हरण के लिए जला है तो उन दरिंदों का क्या, जहां मात्र 2 वर्ष की अबोध बच्ची की चीखें भी कामुकता के आगे हार जाती हैं? 

लाखों रुपए खर्च करके अपनी बेटी के लिए सिंदूर खरीदने वाला बाप किसको जलाए, जिसकी बेटी के हाथों की मेहंदी उतरने से पहले सिंदूर मिट जाता हो।  बच्चों के अंगों को बेचकर शानो-शौकत के लिए सजने वाली महफिलें कतिपय महिलाओं के हाथों से सनी मिलें तो यशोदा का वात्सल्य रोने को क्यों मजबूर न हो। कभी कोरोना के बाजार में लोगों की सांसों में भी सिक्कों की खनखनाहट ढूंढने वाले कतिपय चेहरों से रावण पूछता है कि अपराध के बाजार में उसका अपराध उक्त चेहरों से भी बड़ा है, जहां लोगों की रुकती सांसें धन के बाजार में कद तय करती हों। जहां नशे के बाजार में मां अपने बेटे की जवानी खो चुकी हो और जहां सिक्कों की खनखनाहट में वफादारियों को लकवा मार जाए, वहां रावण दहन कैसा? 

जिस देश में लगभग 3,60,000 महिलाओं के बलात्कार के मामले मात्र 2005 से 2020 तक दर्ज हों, वहां रावण का जलना कैसा! ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यंते  रमंते तत्र देवता’ की संस्कृति में पले-बड़े देश का निर्भया और गुडिय़ा जैसे प्रकरणों से रक्त रंजित होना रावण के जलने पर प्रश्न चिन्ह लगाता है। जिंदगी में व्यक्ति एक बार जलता है परंतु यह अपराधों का रावण हर वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में बड़ा होकर क्यों जल रहा है? अंत में इन शब्दों के साथ : जरूरी है जहन में राम को जिंदा रखना। पुतले जलाने से रावण नहीं मरा करते॥-अजय अवस्थी
 

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