आधुनिक सोच से बदली हरियाणा की खेती की तस्वीर

Edited By Updated: 23 Oct, 2023 06:37 PM

modern thinking changed the picture of haryana s agriculture

जिस राज्य की संस्कृति में ही कृषि बसी हो, उस राज्य की खेती और वहां का किसान संपन और खुशहाल तो होगा हो।

जिस राज्य की संस्कृति में ही कृषि बसी हो, उस राज्य की खेती और वहां का किसान संपन और खुशहाल तो होगा हो। हरियाणा में मनोहर लाल सरकार आने के बाद से कृषि विकास में आया ठहराव खत्म हुआ और यहां की खेती और बाड़ी के स्वरूप में क्रांतिकारी बदलाव आना शुरू हुआ है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जहां कृषि की उत्पादकता को बढ़ाने के उपायों को प्रोत्साहित किया वहीं कृषि उपज के उचित व बेहतर मूल्य दिलाने के पुख्ता बंदोचरत किए हैं, जिससे किसानों की आमदनी में यलेखनीय वृद्धि हुई है।

राज्य में 'मेरी फसल और मेरा ब्यौरा जैसे पोर्टल से किसानों की जिंदगी खुशहाल हुई है। पर्यावरण संरक्षण के अनुकृत खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य में गेहूं व धान जैसी फसलों की खेती को सीमित कर उसकी जगह मांग आधारित कम लागत और अधिक पैदावार देने वाली फसलों को प्राथमिकता दी गई है। मिट्टी की सेहत और जल संरक्षण पर जोर देते हुए खेती को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने की नीति तैयार की गई है। जल संरक्षण के मद्देनजर दो लाख एकड़ भूमि में धान को सीधी बिजाई की जा रही है। खेती चाली जमीन की मिट्टी के सूक्ष्म पोषक तत्वों को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। भूवल के अंधाधुंभ दोहन को रोककर राज्य सरकार ने सूक्ष्म सिंचाई योजना लागू की है।

राज्य में कृषि क्षेत्र और किसान मुख्यमंत्री के दिल के सबसे नजदीक है। खेती को लागत को घटाने के लिए सरकार किसानों को रियायती दरों। पर प्रमुख इनपुट बीज, फर्टिलाइजर, कीटनाशक, सिचाई और अन्य वस्तुएं उपलब्ध करा रही है। मांग पर आधारित खेती से किसानों को बाजार में जहां अच्छा मूल्य मिलता है, वहीं गेहूं च चावल जैसी फसलों की खेती कम होने से मिट्टी व जल संरक्षण में सहूलियत होती है।

सरकार की फसल विविधीकरण को विशेष पहल को हरियाणा के किसानों ने आगे बढ़कर अपनाया है। मोटे अनाज की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाती है। 
फसलों के लिए भावांतर भरपाई योजना लागू करने वाले राज्यों में हरियाणा का नाम प्रमुखता से लिया जाने लगा है। गिरते भूजल को रोकने के लिए विविधीकरण योजना के तहत चागवानी फसलों पर पिछले 9 सालों में कुल 2035 करोड़ रुपए व्यय किए जा चुके हैं। अक्खनीय प्रगति से किसानों को आमदनी बढ़ाने में मदद मिली है। जबकि पूर्ववर्ती सरकार के वर्ष 2005 से 2014 के दौरान केवल 249 करोड़ रुपए हो व्यय किए गए थे। यही नहीं फसल अवशेष प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़कर काम कर रहा है।

खेती को दूसरी बड़ी समस्या पराली प्रबंधन थी, जिस पर सरकार ने विशेष ध्यान दिया और किसानों को इसके प्रति जागरूक करने के साथ जाधुनिक मशीनों पर जोर दिया है। पराली प्रबंधन करने वाले किसानों को वित्तीय मदद भी मुहैया कराई जा रही है। खाद्य सुरक्षा के लिए केंद्रीय पूल में अपनी भागीदारी करने वालों में हरियाणा दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। केंद्रीय पूल को कुल खरोद का लगभग एक तिहाई हिस्सा हरियाणा से होता है। किसानों को सर्वाधिक 14 फसलों की उपज की खरीद करने काला हरियाणा देश का पहला राज्य है। यह देश के दूसरे देशों के मुकाबले चहुत अधिक है।

किसानों को उपज का एक-एक दाना खरीदने के लिए प्रतिबद्ध हरियाणा ने आधुनिक टेक्नोलॉजी को माध्यम बनाया है। मुख्यमंत्री की पहल पर शुरू हुए मेरी फसल मेरा ब्यौरा नामक पोर्टल को लोकप्रियता की गूंज हरियाणा के बाहर भी सुनाई देने लगी है। फसल की बुवाई से लेकर उपज के बाजार तक पहुंचाने की प्रत्येक कड़ी पर नजर रखने वाला यह पोर्टल राज्य के 9 लाख से अधिक किसानों को भरपूर मदद कर रहा है। इसके माध्यम से ही उपज के मूल्य का 45 हजार करोड़ रुपए इसी साल 24 घंटे के भीतर उनके बैंक खाते में जमा कराया गया।

फसलों को सिचाई में पानी को बरबादी रोकने के लिए राज्य में सूक्ष्म सिंचाई योजना को प्रोत्साहन दिया गया है। गो और धान जैसी खेती को जगह ऐसी फसलों को प्राथमिकता दी जा रही है जिसको सिचाई में पानी का कम इस्तेमाल होता है। राज्य में मिट्टी व जल संरक्षण के लिए राज्य की 20,000 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती के साथ जैविक खेती पर विशेष जोर दिया जा रहा है। हरियाणा में 6000 एकड़ भूमि पर मोटे अनाज वाली फसलों की खेती की जा रही है। सूचना प्रौद्योगिकी आधारित इस पोर्टल पर उनकी ओर से ही दर्ज आंकड़ों को सरकार उच्च प्राथमिकता देती है।
 

बीज उत्पादन, पराली प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई और दैवीय आपदाओं में फसलों के खराब होने पर मुआवजा भी इसी आधार पर दिया जाता है। फसलों को खरीद में दूसरे राज्यों और चिचीलियों की धांधली को रोकने में यह पोर्टल काफी कारगर साबित हुआ है। इस क्षेत्र में भ्रष्टाचार पर काबू पाने में सफलता मिली है। किसानों को किसी भी तरह शिकायत का त्वरित निपटारा इसी के माध्यम से कर दिया जाता है।

मुख्यमंत्री टैक्नोलॉजी के इस्तेमाल को लेकर खासा प्रोत्साहन देते हैं। इसीलिए कृषि क्षेत्र में आधुनिक टैक्नोलॉजी के उपयोग को बढ़ावा देने की नीति से काफी मदद मिली है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल को राज्य की खेती और अपने किसानों पर पूरा भरोसा है। तभी तो कृषि उत्पादों के निर्यात में हरियाणा अग्रणी भूमिका निभा रहा है। राज्य की प्रमुख विपणन सहकारी एजेंसी हैफेडने बीते वर्ष 840 करोड़ रुपए मूल्य के बासमती चावल का निर्यात किया है। - बागवानी डा. एस.पी. सिंह(लेखक चरित्र कृषि पत्रकार है)

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