नशों का संताप भोगता पंजाब

Edited By Updated: 18 Oct, 2026 05:56 AM

punjab suffers the scourge of drug addiction

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भाजपा की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के समापन पर जालंधर में 30 सितम्बर, 2026 को सार्वजनिक तौर पर यह घोषणा की कि उनकी पार्टी 31 दिसम्बर, 2029 तक पंजाब को ‘चिट्टा’ मुक्त कर देगी। इसी तरह कुछ अन्य राजनीतिक पाॢटयां, सामाजिक...

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भाजपा की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के समापन पर जालंधर में 30 सितम्बर, 2026 को सार्वजनिक तौर पर यह घोषणा की कि उनकी पार्टी 31 दिसम्बर, 2029 तक पंजाब को ‘चिट्टा’ मुक्त कर देगी। इसी तरह कुछ अन्य राजनीतिक पाॢटयां, सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं भी नशे के विरुद्ध निर्णायक कार्यों में जुटी हुई हैं। श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार कुलदीप सिंह गडग़ज्ज ने ‘मीरी पीरी खालसा मार्च’ के दौरान नशे की रोकथाम के लिए विशेष रूप से गांवों में प्रचार करते हुए नशा पीड़ितों को दुत्कारने की बजाय सहानुभूति के साथ सुधार की जरूरत पर जोर दिया। अफसोस की बात तो यह है कि अनेक प्रयासों के बावजूद देश भर में, खास तौर पर पंजाब में शायद ही कोई ऐसा दिन बीतता हो, जब नशे के सेवन के कारण युवाओं की मौतें, आत्महत्याएं, हत्या, लूट-खसूट, गैंगस्टरवाद और बिगड़ती कानून-व्यवस्था से जुड़े घिनौने कांड सामने न आते हों।

4 अक्तूबर को अंग्रेजी के एक राष्ट्रीय स्तर के अखबार में नशे के संबंध में बङ्क्षठडा से प्रकाशित खबर ने मेरा ध्यान आकॢषत किया, तो मेरी इस कलम ने इस गंभीर समस्या की ओर रुख किया। विश्वसनीय खबर के अनुसार तलवंडी साबो उपमंडल के अंतर्गत पड़ते माही नंगल गांव के निकट 23 वर्षीय मृतक युवक के बाजू में धंसी हुई सिरिंज मिली। वास्तव में राजप्रीत सिंह 2 अक्तूबर की शाम से लापता था। उसके पारिवारिक सदस्यों के अनुसार राजप्रीत को 6 महीनों से चिट्टे की लत लग चुकी थी और वह उपचाराधीन भी रहा। वह अपने पीछे विधवा मां और एक साल के बच्चे वाली पत्नी को छोड़ गया।

माता मनदीप कौर ने रोते-बिलखते सरकार से इस प्रकार अपील की, ‘‘हमें 1000-1500 रुपए की जरूरत नहीं है। गांवों और शहरों में नशा बेचना बंद करो। हम खुद इतने पैसे इकट्ठे करके सरकार को दे दिया करेंगे।’’ संभवत: ग्रामीणों को भी यह अहसास हो चुका है कि कर्जों के सिर पर सरकार चल रही है और शायद उसे फंड की जरूरत हो। इससे बढ़कर शर्मनाक फटकार सरकार के लिए और क्या हो सकती है? ग्रामीणों के अनुसार इस गांव के कई युवा पहले भी नशे का शिकार हो चुके हैं। नशे के विरुद्ध युद्ध के 19 महीने पूरे होने पर पंजाब के विशेष डी.जी.पी. (कानून एवं व्यवस्था) प्रवीन कुमार सिन्हा ने आंकड़े जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि 1 मार्च, 2023 से अब तक 63,616 प्राथमिकियां दर्ज करके 81,107 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। 4161 किलो हैरोइन, 10 क्विंटल अफीम, 476 क्विंटल भुक्की (पोस्त), 103 किलो चरस, 1747 किलो गांजा, 65.75 लाख नशीली गोलियां और 22.2 करोड़ ड्रग मनी भी जब्त की गई। बी.एस.एफ. पंजाब फ्रंटियर के आई.जी. अतुल फुलजेले के अनुसार बीते 9 महीनों के दौरान पाकिस्तान से तस्करी कर लाई गई 850 किलो हैरोइन पकड़ी गई, जबकि वर्ष 2025 में 415 किलो बरामद की गई थी। 

यह एक कड़वी सच्चाई है कि हजारों की तादाद में गिरफ्तार किए गए नशा तस्करों/अपराधियों को कानूनी कमियों के कारण और राजनीतिक दबाव में रिहा कर दिया जाता है। सवाल यह भी है कि नशे के जखीरे को रीसाइकिल करके कहीं दोबारा गांवों और कैमिस्टों के पास तो नहीं पहुंचाया जा रहा? यह सब कुछ राजनीतिक नेताओं, उच्च पुलिस अधिकारियों, नशा तस्करों और सरकार के कमाऊ पूतों (पुलिस) की मिलीभगत का ही नतीजा हो सकता है। कुछ नेता और पुलिस अधिकारी परिणाम भुगत भी रहे हैं। नौकरियों का झांसा देने वाले नेताओं को यह अहसास होना चाहिए कि आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पी.एल.एफ.एस.) के पिछले सर्वे के अनुसार बेरोजगारी की औसत दर पंजाब में 22.3 प्रतिशत रही, हिमाचल में 24.1 प्रतिशत और हरियाणा में 11.8 प्रतिशत, जबकि देश की औसत दर 15.9 प्रतिशत थी। पंजाब के हुक्मरानों जागो! युवाओं को गुमराह करने की बजाय उनके सुनहरे भविष्य के लिए प्रयासरत होओ, उनकी समस्याएं हल हों। भारत से सभी युद्ध हारने के बावजूद पाकिस्तान भारत को ‘हजार घाव देने’ की नीति के तहत हमारे देश के भीतर नशे और जासूसी का जाल बिछाकर ‘हनी ट्रैप’ के जरिए युवा पीढ़ी को इस हद तक कमजोर कर देना चाहता है, कि वे सेना में भर्ती होने के काबिल ही न रहें। फिर तो युद्ध हारा ही समझो! हुक्मरान सतर्क रहें।

चीन ‘अफीमचियों-नशेडिय़ों का देश’ के रूप में जाना जाता था, बीमारियों और नशे के कारण मौतें बढ़ती जा रही थीं। भारत की आजादी के 2 वर्ष बाद वर्ष 1949 में चीन में जबरदस्त क्रांति आई। सबसे पहले पी.एल.ए. की देखरेख में नशे के विरुद्ध कड़ा कानून बनाया गया। फिर नशे के भंडारों को आग के हवाले करके ड्रग तस्करों, अपराधी नेताओं और बेलगाम भ्रष्ट नौकरशाही को फांसी दे दी गई। आज चीन हर लिहाज से दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभर रहा है। हम अमित शाह जी द्वारा दिसम्बर 2029 तक पंजाब को ‘चिट्टा मुक्त’ करने के संकल्प की सराहना करते हैं, परंतु इसे केवल पंजाब तक ही सीमित न रखा जाए, बल्कि समूचे देश को नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया जाए, अन्यथा नशा गुजरात या कई अन्य राज्यों अथवा बंगलादेश-नेपाल जैसे देशों के जरिए पंजाब में पहुंचता रहेगा।

इंटरनैशनल मैडीकल हैल्पलाइन और एंटी-ड्रग सोसायटी का ऑप्रेशंस डायरैक्टर होने के नाते मैं प्रधानमंत्री जी से अपील करता हूं कि चीन के पदचिन्हों पर चलते हुए नए नशा विरोधी कानून बनाकर नशे के सौदागरों, चाहे वे राजनीतिक नेता हों, पुलिस अधिकारी या अफसरशाही, को दंडित किया जाए और नशे के जखीरे को नष्ट कर दिया जाए। ऐसा करने से बेरोजगारी पर रोक लगेगी, बहुपक्षीय विकास को बढ़ावा मिलेगा और भारत को नशा मुक्त घोषित किया जा सकेगा। इसी में देश, सेना और युवाओं की भलाई होगी और जंतर-मंतर पर होने वाला शोर-शराबा भी कम होगा।-ब्रि. कुलदीप सिंह काहलों 
 

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