Edited By jyoti choudhary,Updated: 25 May, 2026 06:07 PM

सरकार ने लोकसभा में बताया है कि देश में बिना दावे वाली वित्तीय संपत्तियों का कुल आंकड़ा वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर लगभग ₹1.1 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा बैंक खातों में जमा राशि का है।
बिजनेस डेस्कः सरकार ने लोकसभा में बताया है कि देश में बिना दावे वाली वित्तीय संपत्तियों का कुल आंकड़ा वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर लगभग ₹1.1 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा बैंक खातों में जमा राशि का है।
करीब ₹83,000 करोड़ ऐसे बैंक खातों में पड़े हैं जिन पर लंबे समय से कोई दावा नहीं किया गया है। इसके अलावा लगभग ₹10,000 करोड़ के शेयर और ₹14,000 करोड़ की बीमा पॉलिसियां भी ऐसी हैं जिनके मालिक या उत्तराधिकारी अब तक सामने नहीं आए हैं।
पैसा जाता कहां है?
लंबे समय तक दावा न किए गए पैसे को संबंधित नियामक संस्थाओं के पास सुरक्षित रखा जाता है।
बैंक जमा: RBI के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (DEAF) में
शेयर और निवेश: SEBI के निवेशक सुरक्षा और शिक्षा कोष (IPEF) में
यह पैसा खत्म नहीं होता, बल्कि सुरक्षित रहता है और सही दस्तावेजों के साथ बाद में वापस लिया जा सकता है।
क्यों फंस जाता है पैसा?
- पुराने खातों में KYC और रिकॉर्ड की गड़बड़ियां
- नाम, पता या स्पेलिंग में अंतर
- नॉमिनी न जोड़ना
- दस्तावेजों की कमी या उत्तराधिकार विवाद
दावा करना क्यों मुश्किल होता है?
विशेषज्ञों के अनुसार असली चुनौती यह साबित करना होता है कि दावेदार ही वास्तविक मालिक या कानूनी उत्तराधिकारी है। कई बार मामूली रिकॉर्ड अंतर भी प्रक्रिया को लंबा कर देता है और अतिरिक्त दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है।
स्थिति क्यों बढ़ रही है?
पुराने बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड की कमी और बढ़ती उम्र के साथ पहचान संबंधी समस्याएं इस ट्रेंड को और जटिल बना रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह समस्या और बढ़ सकती है।
क्या सरकार कुछ कर रही है?
सरकार, RBI, SEBI और IRDAI ने मिलकर “योर मनी, योर राइट” अभियान चलाया, जिसके जरिए ₹5,777 करोड़ की राशि वापस दिलाई गई। इसके बावजूद कुल बिना दावे वाली संपत्ति लगातार बढ़ रही है।