टैक्स देनदारी शून्य फिर भी काटे ₹5.31 लाख, ITAT ने कहा- पैसा वापस करो

Edited By Updated: 25 Aug, 2026 03:36 PM

5 31 lakh deducted despite zero tax liability itat orders refund

अगर किसी व्यक्ति पर कानून के मुताबिक कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती, तो सरकार उसके नाम पर पहले से काटी गई टैक्स की रकम रोक नहीं सकती। दिल्ली के एक मामले में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने आयकर विभाग को इसी आधार पर बड़ा झटका

नई दिल्ली: अगर किसी व्यक्ति पर कानून के मुताबिक कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती, तो सरकार उसके नाम पर पहले से काटी गई टैक्स की रकम रोक नहीं सकती। दिल्ली के एक मामले में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने आयकर विभाग को इसी आधार पर बड़ा झटका दिया है। ट्रिब्यूनल ने ₹5,31,680 के TDS को करदाता को वापस करने का रास्ता साफ कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला वित्त वर्ष 2019-20 से जुड़ा है। दिल्ली के जोरबाग निवासी एक करदाता ने तय समयसीमा में अपनी मूल ITR दाखिल नहीं की थी। बाद में आयकर विभाग को इनसाइट पोर्टल के जरिए कुछ हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन की जानकारी मिली।

इसके आधार पर 27 मार्च 2023 को विभाग ने उन्हें इनकम टैक्स एक्ट की धारा 148 के तहत नोटिस जारी किया। नोटिस के जवाब में करदाता ने रिटर्न दाखिल की और करीब ₹1.38 करोड़ का बिजनेस लॉस दिखाया। री-असेसमेंट के बाद उनकी टैक्सेबल इनकम शून्य रही।

करदाता ने दलील दी कि जब उनकी कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती, तो पहले से काटे गए ₹5,31,680 TDS की रकम उन्हें वापस मिलनी चाहिए।

आयकर विभाग ने क्यों रोका रिफंड?

विभाग ने रिफंड देने से इनकार करते हुए कहा कि करदाता ने मूल रूप से धारा 139 के तहत ITR दाखिल नहीं की थी। विभाग के मुताबिक, धारा 148 के नोटिस के जवाब में दाखिल रिटर्न में पहली बार रिफंड का दावा किया गया था, इसलिए उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

करदाता ने इस फैसले को CIT(A) के सामने चुनौती दी, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला ITAT दिल्ली पहुंचा।

ITAT ने क्या कहा?

11 अगस्त 2026 को ITAT की दिल्ली बेंच ने मामले की सुनवाई की और विभाग की दलील को खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल ने माना कि अगर री-असेसमेंट के बाद करदाता की टैक्सेबल इनकम शून्य है, तो उसके नाम पर पहले काटी गई TDS की रकम को सरकार अपने पास नहीं रख सकती।

इस मामले में Section 237 भी महत्वपूर्ण है। यह प्रावधान उस स्थिति में रिफंड का आधार देता है, जब किसी व्यक्ति से कानूनन देय टैक्स से अधिक रकम वसूल ली गई हो।

ITAT ने यह भी कहा कि विभाग ऐसा कोई स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं दिखा सका, जिसके तहत धारा 148 के जवाब में दाखिल रिटर्न में वैध रिफंड का दावा करने पर पूरी तरह रोक हो।

संविधान का Article 265 भी अहम

ट्रिब्यूनल ने संविधान के Article 265 का भी हवाला दिया। इसके मुताबिक, कानून के अधिकार के बिना कोई टैक्स वसूला नहीं जा सकता यानी अगर किसी व्यक्ति पर कानून के मुताबिक टैक्स देनदारी शून्य है, लेकिन उसके नाम पर पहले ही ₹5.31 लाख TDS काट लिया गया है, तो वह रकम सरकार के पास टैक्स के रूप में रखने का आधार नहीं बनती।
 

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