AI सेवाओं से भारतीय आईटी कंपनियों को 10-12 अरब डॉलर का राजस्व: नासकॉम

Edited By Updated: 26 Jun, 2026 04:20 PM

ai services to generate 10 12 billion in revenue for indian

भारतीय प्रौद्योगिकी सेवा उद्योग को कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित सेवाओं से 10-12 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व अर्जित करने का अनुमान है और करीब एक-चौथाई कंपनियां एआई के प्रयोगों को सफलतापूर्वक उत्पादन स्तर पर लागू कर चुकी हैं। उद्योग संगठन

नई दिल्लीः भारतीय प्रौद्योगिकी सेवा उद्योग को कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित सेवाओं से 10-12 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व अर्जित करने का अनुमान है और करीब एक-चौथाई कंपनियां एआई के प्रयोगों को सफलतापूर्वक उत्पादन स्तर पर लागू कर चुकी हैं। उद्योग संगठन नासकॉम ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। न्यूयॉर्क में आयोजित 'नासकॉम यूएस सीईओ फोरम' में उद्योग जगत के दिग्गजों ने उन चिंताओं को खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि एआई के आने से पारंपरिक सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवाओं का महत्व कम हो जाएगा। उन्होंने कहा कि एआई के इस दौर में भी वैश्विक कंपनियों के बदलाव में आईटी क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी। 

नासकॉम के अनुसार, एआई से उत्पादकता बढ़ेगी और मानकीकृत तथा दोहराए जाने वाले कार्यों का दायरा घटेगा। हालांकि, इसके साथ ही एआई के उपयोग के लिए आंकड़ों को तैयार और व्यवस्थित करने, अनुप्रयोगों के आधुनिकीकरण, विभिन्न प्रौद्योगिकियों के एकीकरण, एआई प्रशासन, साइबर सुरक्षा, एजेंट प्रबंधन तथा उद्योग-विशिष्ट समाधानों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। बयान के मुताबिक, लगभग 25 प्रतिशत प्रौद्योगिकी सेवा कंपनियों ने एआई प्रयोगों को उत्पादन स्तर पर लागू कर दिया है। इस क्षेत्र में वर्तमान में 20 लाख से अधिक पेशेवर एआई कौशल से लैस हैं, जबकि एक लाख से दो लाख पेशेवरों को उन्नत एआई क्षमताओं का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। करीब 85 प्रतिशत प्रौद्योगिकी सेवा प्रदाताओं के पास अब 'एजेंटिक एआई' मंच उपलब्ध हैं। 

नासकॉम के अनुसार, वर्ष 2030 तक 'एजेंटिक एआई' प्रौद्योगिकी सेवा उद्योग के लिए 300 से 400 अरब डॉलर के अतिरिक्त संभावित व्यय अवसर उपलब्ध करा सकता है। इसमें पुरानी प्रणालियों के आधुनिकीकरण, एआई परिचालन, साइबर सुरक्षा और प्रशासन जैसे क्षेत्र शामिल होंगे। एजेंटिक एआई वह कृत्रिम मेधा प्रणाली है जो केवल निर्देशों का जवाब देने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि किसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए स्वयं योजना बनाती है, निर्णय लेती है, विभिन्न चरणों में काम करती है और जरूरत पड़ने पर उपलब्ध उपकरणों या अन्य सॉफ्टवेयर का भी उपयोग कर सकती है। भारत के महावाणिज्य दूतावास में आयोजित इस फोरम में डेलावेयर के गवर्नर मैट मेयेर तथा अमेरिका में परिचालन कर रही भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) ने भाग लिया। 

नासकॉम के अध्यक्ष राजेश नांबियार ने कहा कि जैसे-जैसे एआई का उपयोग उत्पादन स्तर पर बढ़ेगा, उद्यमों को ऐसे विशेषज्ञ भागीदारों की आवश्यकता होगी जो इस प्रौद्योगिकी को जिम्मेदारी के साथ लागू करने और बड़े पैमाने पर विस्तार देने में सक्षम हों। उन्होंने कहा, "उद्यमों को एआई मॉडल, अनुप्रयोगों, डेटा मंचों, क्लाउड परिवेश, साइबर सुरक्षा नियंत्रण, नियामकीय आवश्यकताओं और उद्योग प्रणालियों को एक विश्वसनीय परिचालन ढांचे में एकीकृत करना होगा। भविष्य में आईटी सेवाओं का महत्व इन सभी प्रणालियों को सुरक्षित, कुशल और बड़े पैमाने पर एक साथ संचालित करने में होगा।" 
 

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