Edited By jyoti choudhary,Updated: 29 Jun, 2026 05:16 PM

दैनिक उपभोक्ता वस्तु (FMCG) क्षेत्र की कंपनियों ने फिलहाल उत्पादों की कीमतें बढ़ाने का फैसला टाल दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट से कच्चे माल की लागत पर दबाव कम हुआ है, जिससे कंपनियों को राहत मिली है। साथ ही कंपनियां बिक्री की रफ्तार बनाए...
बिजनेस डेस्कः दैनिक उपभोक्ता वस्तु (FMCG) क्षेत्र की कंपनियों ने फिलहाल उत्पादों की कीमतें बढ़ाने का फैसला टाल दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट से कच्चे माल की लागत पर दबाव कम हुआ है, जिससे कंपनियों को राहत मिली है। साथ ही कंपनियां बिक्री की रफ्तार बनाए रखने के लिए भी कीमतों में बढ़ोतरी से बच रही हैं।
कंपनी अधिकारियों के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमतें भू-राजनीतिक तनाव से पहले के स्तर पर बनी रहती हैं, तो अतिरिक्त मूल्य वृद्धि की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे पहले बढ़ती लागत की भरपाई के लिए कई कंपनियों ने कीमतें बढ़ाई थीं।
वर्तमान में कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे है। इसके अलावा सितंबर में लागू जीएसटी सुधारों का लाभ भी ग्राहकों तक पहुंचाया गया है, जिससे FMCG सेक्टर में मांग और बिक्री में सुधार देखने को मिल रहा है।
बालाजी वेफर्स के संस्थापक एवं निदेशक चंदू विरानी ने बताया कि कंपनी छोटे पैकों का वजन घटाने और बड़े पैकों के दाम बढ़ाने पर विचार कर रही थी लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद इस योजना को फिलहाल रोक दिया गया है।
वहीं, पार्ले प्रोडक्ट्स ने भी लागत बढ़ने के बावजूद ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ डालने की योजना स्थगित कर दी है। कंपनी के उपाध्यक्ष मयंक शाह ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने के बाद फिलहाल किसी भी उत्पाद की कीमत बढ़ाने का निर्णय नहीं लिया गया है। उनके अनुसार, अधिकांश कंपनियां भी फिलहाल मूल्य वृद्धि को लेकर जल्दबाजी नहीं कर रही हैं।
उद्योग से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी का असर मई से दिखना शुरू हो गया था लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में कंपनियां कीमतों में नई बढ़ोतरी से बचने की रणनीति अपना रही हैं।