UPI MDR: व्यापारियों में गुस्सा, बोले- अब हम नकद पेमेंट को देंगे बढ़ावा

Edited By Updated: 16 Sep, 2026 06:04 PM

upi mdr traders angry say they will now promote cash payments

केंद्र सरकार के 2,000 रुपए से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने वाले फैसले के बाद दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने अतिरिक्त लागत से बचने के लिए ग्राहकों के बीच नकद भुगतान को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। सरकार ने मंगलवार को

नई दिल्लीः केंद्र सरकार के 2,000 रुपए से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने वाले फैसले के बाद दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने अतिरिक्त लागत से बचने के लिए ग्राहकों के बीच नकद भुगतान को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। सरकार ने मंगलवार को बड़े डिजिटल कारोबारी भुगतान के लिए एक नई व्यवस्था के तहत यह शुल्क लागू किया है। इसके साथ ही जनवरी, 2020 से लागू शून्य 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' (एमडीआर) व्यवस्था समाप्त हो गई और 75,000 रुपए या उससे अधिक के भुगतान पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपए होगा। 

कमला नगर मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन गुप्ता ने कहा कि व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की सरकार की पहल का समर्थन किया था लेकिन अगर उन्हें अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा तो वे नकद भुगतान को प्रोत्साहित करेंगे। गुप्ता ने कहा, ''हम पहले से ही लेनदेन शुल्क और 18 प्रतिशत जीएसटी दे रहे हैं। अब अगर सरकार हमसे यूपीआई एमडीआर भी वसूलती है तो हम नकद भुगतान को बढ़ावा देंगे। जब सरकार यूपीआई भुगतान लेकर आई थी, तब हमने इसका समर्थन किया था।'' उन्होंने कहा, ''अगर यूपीआई लेनदेन पर भी शुल्क लगाया जाता है तो हम इसका समर्थन नहीं करेंगे और नकद भुगतान को बढ़ावा देना शुरू करेंगे।''

गुप्ता ने दुकानदारों और व्यापारियों से नकद भुगतान को प्रोत्साहित करने की अपील की। नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन के महासचिव अमित गुप्ता ने कहा कि अतिरिक्त शुल्क के इस निर्णय के बाद अब कम मुनाफे पर काम करने वाले व्यापारियों के लिए यूपीआई भुगतान महंगा विकल्प बन जाएगा। उन्होंने कहा, ''यूपीआई को व्यापारियों और ग्राहकों दोनों के लिए डिजिटल भुगतान सुगम बनाने के लिए शुरू किया गया था। अगर अब 2,000 रुपए से अधिक के लेनदेन पर व्यापारियों को अतिरिक्त शुल्क देना होगा तो उनमें से कई नकद भुगतान को प्राथमिकता देंगे। हमें डिजिटल भुगतान से कोई समस्या नहीं है, लेकिन अतिरिक्त लागत व्यापारियों पर नहीं डाली जानी चाहिए।'' 
 

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