Edited By jyoti choudhary,Updated: 06 Feb, 2026 04:47 PM

आने वाले समय में देश के कारोबारियों को जीएसटी से जुड़ी प्रक्रियाओं में बड़ी राहत मिल सकती है। सूत्रों के मुताबिक अगली जीएसटी काउंसिल बैठक में रजिस्ट्रेशन, रिफंड और ऑडिट प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने पर खास फोकस रहेगा। साथ ही ई-वे बिल सिस्टम में...
बिजनेस डेस्कः आने वाले समय में देश के कारोबारियों को जीएसटी से जुड़ी प्रक्रियाओं में बड़ी राहत मिल सकती है। सूत्रों के मुताबिक अगली जीएसटी काउंसिल बैठक में रजिस्ट्रेशन, रिफंड और ऑडिट प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने पर खास फोकस रहेगा। साथ ही ई-वे बिल सिस्टम में तकनीक के बेहतर इस्तेमाल के जरिए माल ढुलाई में देरी घटाने और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने के उपायों पर भी चर्चा हो सकती है। यह बैठक बजट सत्र के बाद होने की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार, काउंसिल का कारोबारियों की रोजमर्रा की परेशानियों को कम करने पर जोर रहेगा। खासकर जीएसटी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है ताकि दस्तावेजों की जांच और तकनीकी कारणों से होने वाली देरी कम हो सके। उद्देश्य है कि नए कारोबारियों और छोटे उद्यमियों को जल्दी रजिस्ट्रेशन मिल सके और बिजनेस शुरू करने में बाधाएं कम हों।
रिफंड प्रक्रिया को भी ज्यादा ऑटोमेटेड और पारदर्शी बनाने पर चर्चा संभव है। प्रस्ताव है कि कारोबारी अपने रिफंड की स्थिति आसानी से ट्रैक कर सकें और भुगतान में अनावश्यक देरी खत्म हो। इसके अलावा ऑडिट रिपोर्ट और उससे जुड़ी कंप्लायंस को आसान बनाने की दिशा में भी कदम उठाए जा सकते हैं, ताकि ईमानदार टैक्सपेयर्स को बार-बार स्पष्टीकरण देने की परेशानी न हो।
ई-वे बिल सिस्टम में डिजिटल टूल्स और डेटा एनालिटिक्स के इस्तेमाल से जोखिम आधारित जांच व्यवस्था मजबूत करने की योजना पर भी विचार हो रहा है। इससे कम जोखिम वाले मामलों में बार-बार जांच और रुकावट कम हो सकती है, जिससे ट्रांसपोर्ट में देरी घटेगी और सप्लाई चेन सुचारू होगी।
सूत्रों का कहना है कि इंटर-स्टेट मूवमेंट के दौरान होने वाली अनावश्यक चेकिंग और देरी को कम करना भी काउंसिल के एजेंडे में शामिल हो सकता है। अगर ये बदलाव लागू होते हैं तो कारोबारियों के समय और लागत दोनों में कमी आएगी और बिजनेस ऑपरेशन ज्यादा आसान हो सकेंगे।