Edited By jyoti choudhary,Updated: 14 Mar, 2026 02:08 PM

देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े बैंकों में शामिल पंजाब नैशनल बैंक (पी.एन.बी.) बड़े कर्ज डिफॉल्टरों से वसूली की चुनौती से जूझ रहा है। बैंक के सामने देशभर में बड़े कर्जदारों से लगभग 2.59 लाख करोड़ रुपए की वसूली लंबित है। इस बकाया रकम को वापस पाने
बिजनेस डेस्कः देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े बैंकों में शामिल पंजाब नैशनल बैंक (पी.एन.बी.) बड़े कर्ज डिफॉल्टरों से वसूली की चुनौती से जूझ रहा है। बैंक के सामने देशभर में बड़े कर्जदारों से लगभग 2.59 लाख करोड़ रुपए की वसूली लंबित है। इस बकाया रकम को वापस पाने के लिए बैंक ने विभिन्न अदालतों और ट्रिब्यूनलों में 7,374 सिविल केस दायर किए हैं। बैंकिंग क्षेत्र में यह मामला उस समय और चर्चा में आया जब हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी से जुड़े कंपनियों के बड़े कर्ज सामने आए।
नीरव-चोकसी की कंपनियों पर 27,544 करोड़ रुपए बकाया
क्रेडिट ब्यूरो ट्रांसयूनियन सिबिल के जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार चोकसी और नीरव मोदी से जुड़ी कंपनियां गीतांजलि जैम्स और नक्षत्रा ब्रांड्स पर कुल 27,544 करोड़ रुपए का कर्ज बकाया है। दोनों कारोबारी देश छोड़कर फरार हो चुके हैं। उनके भागने के बाद सरकार ने पी.एन.बी. की तत्कालीन प्रबंध निदेशक उषा अनंथा सुब्रमण्यम को पद से हटा दिया था। सूत्रों के अनुसार इतने बड़े कर्ज आम तौर पर कई बैंकों के कंसोर्टियम के जरिए दिए जाते हैं और इसके लिए शीर्ष स्तर पर समन्वय की जरूरत होती है।
कई बड़े बैंक कंसोर्टियम में शामिल
नीरव-चोकसी समूह को दिए गए कर्ज में कई सार्वजनिक और निजी बैंक शामिल थे। इनमें भारतीय स्टेट बैंक, एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, आई.सी.आई.सी.आई. बैंक, आई.डी.बी.आई. बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, इंडसइंड बैंक और कर्नाटक बैंक सहित कई अन्य बैंक शामिल थे। बैंकिंग सूत्रों का कहना है कि बड़े कर्ज को अक्सर छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर मंजूरी दी जाती है, जिससे जोखिम और जवाबदेही बंट जाती है।
अन्य बड़े डिफॉल्टर भी सूची में
पी.एन.बी. के सामने अन्य बड़े कर्जदार भी चुनौती बने हुए हैं। इनमें पूर्व कांग्रेस सांसद लैंको ग्रुप के लगदपति राजगोपाल पर करीब 9,422 करोड़, ए.जी.बी. शिपयार्ड पर 7,609 करोड़ रुपए, सिंगापुर स्थित अबान ऑफशोर और अबान होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड पर हजारों करोड़ रुपये बकाया हैं। ज्वेलरी क्षेत्र की कंपनियों में गिली इंडिया, पी.सी. ज्वैलर और विनसम डायमंड्स भी बड़े डिफॉल्टरों की सूची में शामिल हैं।
खाद्य, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां भी शामिल
बकाया कर्ज की सूची में कई अन्य कंपनियां भी हैं, जिनमें जूम डेवलपर्स, शक्ति भोग फूड्स, मोजर बेयर, सुराना ग्रुप, फ्रॉस्ट इंटरनेशनल और फॉरएवर प्रेशियस ज्वैलरी एंड डायमंड्स प्रमुख हैं। इसी तरह दूरसंचार क्षेत्र से जुड़े कारोबारी सी. शिवंकरण की कंपनी डिशनेट वायरलेस सहित कई ऊर्जा, टेक्सटाइल और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों पर भी हजारों करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है।
बैंकिंग सिस्टम पर उठे सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर कर्ज डिफॉल्ट के मामलों ने बैंकिंग सिस्टम की निगरानी और जोखिम प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब अदालतों और दिवाला प्रक्रिया के जरिए इन रकम की वसूली की कोशिशें जारी हैं, लेकिन इतनी बड़ी रकम की रिकवरी आसान नहीं मानी जा रही।
पंजाब नेशनल बैंक के बड़े डिफॉल्टर
1 गीतांजलि जैम्स
2 नक्षत्र ब्रांड्स
3 ए.बी.जी. शिपयार्ड
4 अबान ऑफशोर
5 गुप्ता पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर
6 गिली इंडिया
7 अबान होल्डिंग पीटीई
8 लैंको ग्रुप
9 हिंद एग्रो इंडस्ट्रीज
10 जूम डेवलपर्स
11 कृष्णा निटवियर टेक्नोलॉजी
12 विंसम डायमंड्स एंड ज्वेलरी
13 सुराना ग्रुप
14 विशाल एक्सपोर्ट्स ओवरसीज
15 अभिनव स्टील एंड पावर
16 सतलुज स्पिनटेक्स
17 एस कुमार्स
18 सिद्धि विनायक लॉजिस्टिक
19 कामाची इंडस्ट्रीज
20 वीजा रिसोर्सेज इंडिया
21 शक्ति भोग फूड्स
22 डिवाइन अलॉयज एंड पावर
23 पायनियर गैस पावर
24 फ्रॉस्ट इंटरनेशनल
25 श्री लक्ष्मी कॉटसिन
26 श्रेणुज एंड कंपनी
27 जेएएस इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड पावर
28 मोसर बेयर ग्रुप
29 एक्टिफ कॉरपोरेशन
30 कोस्टल प्रोजेक्ट
31 कौर साइन इंडस्ट्रीज
32 गुप्ता कोल इंडिया
33 एम्सन इंटरनेशनल
34 पीसी ज्वेलर
35 वंदना विद्युत
36 डिशनेट वायरलेस
37 फॉरएवर प्रेशियस ज्वेलरी एंड डायमंड