FDI नियमों में बदलाव, चीन समेत पड़ोसी देशों के निवेश को राहत

Edited By Updated: 10 Mar, 2026 05:21 PM

changes fdi rules provide relief to investments from neighboring countries

केंद्र सरकार ने विदेशी निवेश से जुड़े नियमों में अहम बदलाव करते हुए पड़ोसी देशों से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों को आसान करने का फैसला लिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार यह निर्णय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट...

बिजनेस डेस्कः केंद्र सरकार ने विदेशी निवेश से जुड़े नियमों में अहम बदलाव करते हुए पड़ोसी देशों से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों को आसान करने का फैसला लिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार यह निर्णय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिया गया। यह बदलाव वर्ष 2020 में जारी किए गए प्रेस नोट-3 में संशोधन के रूप में किया गया है।

प्रेस नोट-3 के तहत भारत की सीमा से सटे देशों से आने वाले निवेश के लिए पहले सरकार की पूर्व अनुमति जरूरी होती थी। नए फैसले के बाद इस प्रक्रिया को आसान किया गया है, जिससे ऐसे देशों के निवेशकों के लिए भारत में निवेश करना अपेक्षाकृत सरल हो जाएगा। भारत की सीमा चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान से लगती है, इसलिए इन देशों के निवेश पर यह नियम लागू होता है।

चीन से निवेश अभी भी बहुत कम

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक चीन से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का हिस्सा अभी भी काफी सीमित है। अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 के बीच भारत में आए कुल एफडीआई में चीन की हिस्सेदारी लगभग 0.32 प्रतिशत रही, जो करीब 2.5 अरब डॉलर के आसपास है।

भारत और चीन के रिश्तों में जून 2020 में गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प के बाद तनाव बढ़ गया था। इसके बाद भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर टिकटॉक, वीचैट और यूसी ब्राउजर सहित 200 से अधिक चीनी मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था।

व्यापार बढ़ा

हालांकि निवेश का स्तर कम होने के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है। चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का चीन को निर्यात घटकर लगभग 14.25 अरब डॉलर रह गया, जबकि चीन से आयात बढ़कर 113 अरब डॉलर से अधिक हो गया। इसके चलते दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा भी बढ़कर करीब 99 अरब डॉलर के आसपास पहुंच गया।

सरकार का मानना है कि निवेश नियमों में ढील से विदेशी निवेश को बढ़ावा मिल सकता है और भारत में कारोबार तथा औद्योगिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।

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