ईरान जंग का असर: भारतीय एयरलाइंस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स का किराया 15% बढ़ाया; क्या जेट फ्यूल की भी हो रही कमी?

Edited By Updated: 10 Mar, 2026 09:55 PM

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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब आम यात्रियों की जेब पर भी पड़ने लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की कई एयरलाइंस ने इंटरनेशनल फ्लाइट टिकटों की कीमत में करीब 15% तक बढ़ोतरी कर दी है।

इंटरनेशनल डेस्कः मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब आम यात्रियों की जेब पर भी पड़ने लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की कई एयरलाइंस ने इंटरनेशनल फ्लाइट टिकटों की कीमत में करीब 15% तक बढ़ोतरी कर दी है। समाचार एजेंसी Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और Strait of Hormuz के प्रभावित होने से कच्चे तेल और जेट फ्यूल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसका असर अब वैश्विक एविएशन इंडस्ट्री पर भी साफ दिखाई देने लगा है।

भारतीय एयरलाइंस आगे भी बढ़ा सकती हैं किराया

रिपोर्ट के अनुसार भारत की कई एयरलाइंस कंपनियों ने कहा है कि अगर जेट फ्यूल यानी ATF (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो आने वाले दिनों में टिकट की कीमतें और बढ़ाई जा सकती हैं। एयरलाइंस कंपनियों का कहना है कि ऑपरेशन चलाने की लागत तेजी से बढ़ रही है और ऐसे में किराया बढ़ाने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा है।

जेट फ्यूल की कीमत लगभग दोगुनी

28 फरवरी से शुरू हुए ईरान-इजराइल संघर्ष के बाद तेल की सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ा है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। वैश्विक बाजार में Brent Crude Oil की कीमत लगभग 93 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। वहीं इससे एक दिन पहले यह करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक चली गई थी।

इसी तरह कई बाजारों में जेट फ्यूल की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं। युद्ध से पहले जेट फ्यूल लगभग 85–90 डॉलर प्रति बैरल था अब यह बढ़कर 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच गया है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण अब तक दुनियाभर में 40,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द भी की जा चुकी हैं।

एयरलाइंस के खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा जेट फ्यूल

एविएशन इंडस्ट्री में जेट फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है। आम तौर पर एयरलाइंस के कुल ऑपरेटिंग खर्च में 30% से 40% हिस्सा केवल फ्यूल का होता है। तेल की कीमतों में अचानक हुई इस बढ़ोतरी ने एयरलाइंस कंपनियों के बजट को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। इसी वजह से कई बड़ी कंपनियों ने न केवल टिकट के दाम बढ़ाए हैं बल्कि अपने भविष्य के वित्तीय अनुमान (फाइनेंशियल आउटलुक) भी वापस ले लिए हैं।

वियतनाम में टिकट 70% तक महंगे होने की आशंका

रिपोर्ट के मुताबिक Vietnam में स्थिति और गंभीर हो सकती है। देश की सरकारी एयरलाइन Vietnam Airlines का कहना है कि बढ़ती फ्यूल कीमतों के कारण उनकी ऑपरेटिंग लागत में करीब 70% तक बढ़ोतरी हो गई है। इस वजह से कंपनी टिकट की कीमतों में भी लगभग इतनी ही बढ़ोतरी कर सकती है। एयरलाइन ने सरकार से अनुरोध किया है कि जेट फ्यूल पर लगने वाले पर्यावरण टैक्स को हटाया जाए ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके।

इन अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने भी बढ़ाए टिकट

दुनिया की कई बड़ी एयरलाइंस ने बढ़ती लागत के कारण टिकट महंगे कर दिए हैं।

एयर न्यूजीलैंड

Air New Zealand ने अपने टिकटों के दाम बढ़ाने की घोषणा की है।

  • घरेलू उड़ानों में एक तरफ का किराया 10 न्यूजीलैंड डॉलर बढ़ाया गया

  • शॉर्ट इंटरनेशनल फ्लाइट्स के लिए 20 डॉलर बढ़ोतरी

  • लंबी दूरी की उड़ानों के लिए 90 डॉलर तक बढ़ोतरी

कंपनी ने 2026 के लिए अपना कमाई का अनुमान भी वापस ले लिया है।

हांगकांग एयरलाइंस

Hong Kong Airlines ने फ्यूल सरचार्ज में 35.2% तक बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। मालदीव, बांग्लादेश और नेपाल जैसे रूट्स पर यह शुल्क 284 हांगकांग डॉलर से बढ़ाकर 384 हांगकांग डॉलर कर दिया गया है। वहीं Cathay Pacific ने प्रभावित यात्रियों को विकल्प देने के लिए लंदन और ज्यूरिख के लिए अतिरिक्त उड़ानें शुरू की हैं।

क्वांटास और SAS

ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख एयरलाइन Qantas Airways ने भी अपने इंटरनेशनल रूट्स पर किराया बढ़ा दिया है। हालांकि कंपनी का कहना है कि यूरोप जाने वाली फ्लाइट्स 90% से ज्यादा भरी हुई चल रही हैं, इसलिए वह आने वाले समय में उड़ानों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रही है। इसी तरह उत्तरी यूरोप की एयरलाइन Scandinavian Airlines ने भी बढ़ती लागत को देखते हुए अस्थायी किराया समायोजन लागू किया है।

1970 के दशक जैसा बड़ा तेल संकट बनने की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो यह 1970 के दशक के तेल संकट के बाद का सबसे बड़ा वैश्विक ऊर्जा संकट बन सकता है। ऐसी स्थिति में न केवल हवाई यात्रा महंगी होगी बल्कि दुनियाभर में परिवहन, व्यापार और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

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