शेयर कीमत पर नहीं, कारोबार वृद्धि और लाभप्रदता पर ध्यान दें कंपनियां: एनएसई प्रमुख

Edited By Updated: 27 Jun, 2026 01:17 PM

companies should focus on business growth and profitability

एनएसई के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) आशीष चौहान ने शुक्रवार को कहा कि कंपनियों को केवल शेयर कीमत बढ़ाने की दौड़ में शामिल होने के बजाय टिकाऊ कारोबार खड़ा करने, लाभप्रदता बढ़ाने और दीर्घकालिक मूल्य सृजन पर ध्यान

मुंबईः एनएसई के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) आशीष चौहान ने शुक्रवार को कहा कि कंपनियों को केवल शेयर कीमत बढ़ाने की दौड़ में शामिल होने के बजाय टिकाऊ कारोबार खड़ा करने, लाभप्रदता बढ़ाने और दीर्घकालिक मूल्य सृजन पर ध्यान देना चाहिए। चौहान ने यहां जेआईटीओ इन्क्यूबेशन एंड इनोवेशन फाउंडेशन (जेआईआईएफ) के नौवें स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि किसी कंपनी का बाजार मूल्यांकन उसके कारोबार के प्रदर्शन और वृद्धि को दर्शाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उद्यमियों का उद्देश्य कारोबार का विस्तार करना और मजबूत बुनियादी आधार के जरिए शेयरधारकों के लिए मूल्य सृजित करना होना चाहिए। 

एनएसई के सीईओ ने कहा, "अगर कंपनी का मुनाफा बढ़ेगा तो उसके शेयर का मूल्य भी बढ़ेगा। वास्तविक कारोबारी वृद्धि के बिना मूल्य में लगातार बढ़ोतरी संभव नहीं है।" उन्होंने कहा कि उद्यमियों को बाजार के रुझानों या प्रतिस्पर्धियों के दबाव से प्रभावित होने के बजाय अपने मूल कारोबार पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। जो कंपनियां लगातार वृद्धि करती हैं और बेहतर प्रदर्शन करती हैं, उन्हें अंततः बाजार में पहचान मिलती है। चौहान ने कहा कि सार्वजनिक बाजार लाभ कमाने वाली कंपनियों को ऐसा मूल्यांकन देते हैं, जिसकी बराबरी निजी बही खाता नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि यदि कोई कंपनी सालाना दो करोड़ रुपए का मुनाफा कमा रही है तो सूचीबद्ध होने के बाद उसका बाजार पूंजीकरण 40 से 50 करोड़ रुपए तक हो सकता है। इससे प्रवर्तकों को पूंजी जुटाने, नए साझेदार जोड़ने और कारोबार का विस्तार करने का अवसर मिलता है। 

चौहान ने कहा कि सूचीबद्ध होने से कंपनी को अपनी खुद की एक मुद्रा भी मिल जाती है। प्रवर्तक अपने शेयरों का इस्तेमाल दूसरी कंपनियों के अधिग्रहण, साझेदार जोड़ने और कर्मचारियों को शेयर विकल्प देकर प्रोत्साहित करने के लिए कर सकते हैं। चौहान ने उदाहरण देते हुए कहा कि इन्फोसिस के शुरुआती दौर में एन.आर. नारायण मूर्ति और नंदन नीलेकणी ने प्रतिभाशाली कर्मचारियों को आकर्षित करने के लिए कर्मचारी शेयर विकल्प योजना का प्रभावी उपयोग किया था। उन्होंने कहा, "आप जो भी काम करते हैं, यदि उसे अलग और बेहतर तरीके से करते हैं तो वह भी नवोन्मेष है।" 

चौहान ने कहा कि कारोबार खड़ा करने की यात्रा चुनौतीपूर्ण होती है और सफलता हासिल करने से पहले कई उद्यमियों को वर्षों तक संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना उतना भी कठिन नहीं है, जितना आमतौर पर माना जाता है। हालांकि, सूचीबद्ध होने के बाद कंपनियों को अनुपालन, सुशासन और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। चौहान ने कहा कि पूंजी बाजार कंपनियों को धन जुटाने और विस्तार के अवसर उपलब्ध कराते हैं लेकिन इसके लिए कारोबार में अनुशासन बनाए रखना और दीर्घकालिक मूल्य सृजन पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है।  

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