Edited By jyoti choudhary,Updated: 06 Jul, 2026 12:14 PM

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट का असर जल्द ही भारतीय ईंधन मार्केट पर दिख सकता है। यदि अगल 7 से 10 दिनों तक तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं तो तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल की बिक्री में 'नो-प्रॉफिट, नो-
बिजनेस डेस्कः अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट का असर जल्द ही भारतीय ईंधन मार्केट पर दिख सकता है। यदि अगल 7 से 10 दिनों तक तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं तो तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल की बिक्री में 'नो-प्रॉफिट, नो-लॉस' की स्थिति में पहुंच सकती हैं यानी कंपनियों की लागत और कमाई बराबर हो जाएगी। इसके बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वर्तमान में सरकारी तेल कंपनियां पहले से खरीदे गए महंगे कच्चे तेल के स्टॉक के कारण अंडर-रिकवरी का सामना कर रही हैं। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनियों को 75,000 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति पर दबाव बना हुआ है।
स्थिर कीमतें बनीं तो मिलेगी राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर स्थिर रहती हैं, तो कंपनियां धीरे-धीरे घाटे से उबरकर लागत और आय के संतुलन पर पहुंच सकती हैं। हालांकि, एलपीजी (रसोई गैस) पर अब भी कंपनियों को प्रति सिलेंडर करीब 500 रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बढ़ी वैश्विक सप्लाई
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम के बाद कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ी है। इसके साथ ही सऊदी अरब और रूस के नेतृत्व में सात प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। इससे पहले 28 फरवरी को पश्चिम एशिया युद्ध शुरू होने के बाद से इस ग्रुप ने उत्पादन कोटा में 9.40 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) बढ़ाने का फैसला लिया था। हालांकि, यह उत्पादन वृद्धि काफी हद तक केवल कागजों तक ही सीमित रही क्योंकि अमेरिका और इज़राइल के ईरान पर हमलों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हेा गया और तेल सप्लाई ठप्प हो गई। अब होर्मुज खुलने से सप्लाई सामान्य हुई है। इसके अलावा ईरान का तेल भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में आग या है। इससे कई देशों पर दबाव कम हुआ है। इसके साथ ही वेनेजुएला से तेल आपूर्ति बढ़ने से भी बाजार को राहत मिली है।