Edited By Pardeep,Updated: 08 Jun, 2026 07:43 AM

मध्य पूर्व में एक बार फिर बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है।
इंटरनेशनल डेस्कः मध्य पूर्व में एक बार फिर बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। रविवार देर रात बाजार खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसकी मुख्य वजह ईरान और इजराइल के बीच हालिया सैन्य कार्रवाई है, जिसने क्षेत्र में लागू नाजुक युद्धविराम (सीजफायर) को खतरे में डाल दिया है।
क्या हुआ?
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने रविवार को इजराइल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। अप्रैल में दोनों देशों के बीच युद्धविराम लागू होने के बाद यह पहली बड़ी मिसाइल कार्रवाई मानी जा रही है। इसके कुछ समय पहले इजराइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत में हवाई हमला किया था। इजराइल का दावा है कि यह हमला ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाकर किया गया था। इन घटनाओं ने निवेशकों और तेल कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है कि कहीं क्षेत्र फिर से बड़े युद्ध की ओर न बढ़ जाए।
कच्चे तेल की कीमतों में आग, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट
इस ताजा संघर्ष का असर दुनिया भर के बाजारों पर दिखने लगा है। रविवार देर रात को जैसे ही बाजार खुले, कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत तक का उछाल दर्ज किया गया। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत बढ़कर 96 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जबकि अमेरिकी मार्केट मार्कर वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) भी 93 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। जानकारों का कहना है कि आपूर्ति की कमी के कारण ब्रेंट क्रूड पहले ही 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है, जिससे दुनिया भर में ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं और महंगाई चरम पर है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?
दुनिया के तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। फरवरी में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर शुरुआती हमलों के बाद से ईरान ने इस मार्ग पर कड़े नियंत्रण लगाए हुए हैं, जिससे तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है। बाजार को उम्मीद थी कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते के बाद यह मार्ग फिर से पूरी तरह खुल सकता है, लेकिन ताजा घटनाओं ने इन उम्मीदों को कमजोर कर दिया है।
पहले क्यों घट रही थीं कीमतें?
पिछले कुछ हफ्तों में तेल की कीमतों में कुछ नरमी देखी गई थी क्योंकि:
- अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ रही थी।
- युद्ध समाप्त होने की संभावना बढ़ रही थी।
- होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की उम्मीद थी।
- वैश्विक आपूर्ति में सुधार की संभावना दिखाई दे रही थी।
लेकिन रविवार की घटनाओं के बाद बाजार को लगने लगा है कि शांति समझौते में अभी और समय लग सकता है।
दुनिया पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसके कई प्रभाव हो सकते हैं:
- पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं।
- हवाई यात्रा और माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है।
- महंगाई में तेजी आ सकती है।
- शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।