तेल कीमतों में नरमी से भारतीय बाजारों में लौटी विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी

Edited By Updated: 09 Jul, 2026 12:26 PM

foreign investor interest returns to indian markets as oil prices soften

करीब डेढ़ साल तक भारतीय बाजारों से दूरी बनाए रखने के बाद वैश्विक निवेशकों का रुझान एक बार फिर भारत की ओर बढ़ने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, रुपए में स्थिरता और सरकार की नीतिगत पहल से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।

बिजनेस डेस्कः करीब डेढ़ साल तक भारतीय बाजारों से दूरी बनाए रखने के बाद वैश्विक निवेशकों का रुझान एक बार फिर भारत की ओर बढ़ने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, रुपए में स्थिरता और सरकार की नीतिगत पहल से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। अंतरराष्ट्रीय निवेश बैंक अब भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार को आकर्षक निवेश विकल्प के रूप में देखने लगे हैं।

सिटीग्रुप, गोल्डमैन सैक्स, बार्कलेज और मैक्वेरी जैसी वैश्विक वित्तीय संस्थाओं का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत विकास दर और बेहतर आर्थिक संकेतकों ने निवेशकों की धारणा बदलनी शुरू कर दी है। सिटीग्रुप की भारत टीम ने अमेरिका के 36 संस्थागत निवेशकों से मुलाकात के बाद कहा कि भारतीय परिसंपत्तियों में निवेश की रुचि तेजी से लौट रही है।

पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान निवेशकों का झुकाव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े बाजारों की ओर था। वहीं अमेरिका-ईरान तनाव के कारण बढ़ी तेल कीमतों ने भारत के चालू खाते और रुपए पर दबाव डाला था। अब ब्रेंट क्रूड की कीमतों में जून तिमाही के दौरान करीब 30 प्रतिशत की गिरावट और भू-राजनीतिक तनाव में कमी से भारत के लिए माहौल अनुकूल हुआ है।

इसका असर बाजार में भी दिखाई देने लगा है। जून में भारतीय शेयर बाजार ने अन्य उभरते बाजारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। विदेशी निवेशकों ने भारतीय सरकारी बॉन्ड में रिकॉर्ड 4.4 अरब डॉलर का निवेश किया, जबकि शेयर बाजार से विदेशी निकासी पिछले चार महीनों में सबसे कम रही। रुपया भी एशिया की मजबूत प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल रहा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे एआई-केंद्रित बाजारों में जोखिम बढ़ने से निवेशकों का एक हिस्सा अब भारत और चीन जैसे बड़े उभरते बाजारों की ओर रुख कर सकता है। साथ ही भारतीय शेयर बाजार की अपेक्षाकृत कम अस्थिरता भी इसे निवेशकों के लिए आकर्षक बना रही है।

हालांकि, कमजोर मानसून, एल-नीनो की आशंका, मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिका में लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें अभी भी जोखिम बने हुए हैं। इसके बावजूद विश्लेषकों का मानना है कि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, नियंत्रित राजकोषीय घाटा और सरकार की निवेश समर्थक नीतियां विदेशी निवेश को आगे भी गति दे सकती हैं। गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि यदि भारत को ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट बॉन्ड इंडेक्स में शामिल किया जाता है, तो देश में लगभग 15 अरब डॉलर का अतिरिक्त विदेशी निवेश आ सकता है।

 

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