Edited By jyoti choudhary,Updated: 15 May, 2026 04:35 PM

Rajasthan: राजस्थान में पेट्रोल और डीजल की सीमित बिक्री को लेकर तेल कंपनियों और पेट्रोल पंप संचालकों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। तेल कंपनियों द्वारा ईंधन बिक्री की मात्रा तय किए जाने से प्रदेशभर के डीलर्स परेशान हैं। पेट्रोल पंप संचालकों का आरोप...
Rajasthan: राजस्थान में पेट्रोल और डीजल की सीमित बिक्री को लेकर तेल कंपनियों और पेट्रोल पंप संचालकों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। तेल कंपनियों द्वारा ईंधन बिक्री की मात्रा तय किए जाने से प्रदेशभर के डीलर्स परेशान हैं। पेट्रोल पंप संचालकों का आरोप है कि कंपनियां मौखिक निर्देश और मोबाइल संदेशों के जरिए तय सीमा से ज्यादा पेट्रोल-डीजल नहीं बेचने का दबाव बना रही हैं। नियम तोड़ने पर तेल सप्लाई रोकने और पेट्रोल पंप बंद कराने तक की चेतावनी दी जा रही है।
इस मामले को लेकर राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) और अन्य तेल कंपनियों के अधिकारियों को पत्र लिखकर विरोध दर्ज कराया है। एसोसिएशन का कहना है कि कंपनियों की ओर से डिपो से ईंधन की सप्लाई भी कम कर दी गई है, जिससे कई इलाकों में पेट्रोल पंपों पर संकट की स्थिति बन रही है।
पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर लिमिट तय
डीलर्स के अनुसार अलग-अलग कंपनियों ने अलग-अलग लिमिट तय की है। IOCL ने अधिकतम 50 हजार रुपए तक का डीजल और 5 हजार रुपए तक का पेट्रोल बेचने की सीमा तय की है। वहीं BPCL और HPCL ने डीजल की बिक्री 200 लीटर और पेट्रोल की बिक्री करीब 50 लीटर तक सीमित कर दी है। पंप संचालकों का कहना है कि ये आदेश आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किए गए, जिससे ग्राहकों और डीलर्स दोनों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि कोई ग्राहक तय सीमा से अधिक ईंधन मांगता है और उसे मना किया जाता है, तो विवाद और कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका बढ़ सकती है। इसके अलावा कई पेट्रोल पंपों पर कम सप्लाई के कारण ईंधन खत्म होने की नौबत भी आ रही है।
किसानों और छोटे उद्योगों की बढ़ी चिंता
खुले में डीजल बिक्री पर रोक से किसानों और छोटे उद्योगों की चिंता भी बढ़ गई है। किसान कृषि कार्यों के लिए ड्रमों में डीजल स्टोर करते हैं, जबकि सड़क निर्माण और छोटे कारखानों में भी खुले डीजल का इस्तेमाल होता है। डीलर्स का कहना है कि इस पाबंदी से खेती और उद्योग दोनों प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने सरकार और तेल कंपनियों से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने और आम जनता को भरोसे में लेने की मांग की है।