Edited By jyoti choudhary,Updated: 08 May, 2026 05:54 PM

महंगाई से राहत की उम्मीद कर रहे उपभोक्ताओं को आने वाले महीनों में बड़ा झटका लग सकता है। देश की प्रमुख FMCG कंपनियां साबुन, शैंपू, बिस्किट, पैकेज्ड फूड और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी की तैयारी कर रही हैं।
बिजनेस डेस्कः महंगाई से राहत की उम्मीद कर रहे उपभोक्ताओं को आने वाले महीनों में बड़ा झटका लग सकता है। देश की प्रमुख FMCG कंपनियां साबुन, शैंपू, बिस्किट, पैकेज्ड फूड और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी की तैयारी कर रही हैं। कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल, पैकेजिंग और परिवहन लागत में लगातार बढ़ोतरी के कारण कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया है।
डाबर इंडिया ने संकेत दिए हैं कि अगले कुछ महीनों में उत्पादों के दाम फिर बढ़ सकते हैं। कंपनी के मुताबिक, पैकेजिंग सामग्री और अन्य इनपुट कॉस्ट लगातार बढ़ रही है। डाबर मौजूदा तिमाही में पहले ही अपने कई उत्पादों की कीमतों में लगभग 4 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर चुका है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने FMCG कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता के चलते वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इसका असर परिवहन, प्लास्टिक पैकेजिंग और उत्पादन लागत पर पड़ेगा।
कंपनियों ने जताई चिंता
बड़ी कंपनियां जैसे हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL), नेस्ले, ब्रिटानिया, ITC, मैरिको और गोदरेज कंज्यूमर ने भी बढ़ती इनपुट लागत को लेकर चिंता जताई है। HUL के लिए चाय और पैकेजिंग महंगी हो रही है, जबकि नेस्ले पर कॉफी, दूध और पैकेजिंग लागत का दबाव बढ़ा है। वहीं ब्रिटानिया और ITC जैसी कंपनियों को गेहूं, दूध और खाद्य तेलों की कीमतों में वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है। इसका असर बिस्किट, स्नैक्स और पैकेज्ड फूड के दामों पर दिखाई दे सकता है।
आम आदमी के बजट पर बढ़ेगा बोझ
हालांकि ग्रामीण और छोटे शहरों में FMCG उत्पादों की मांग में सुधार देखा जा रहा है लेकिन कंपनियों पर मुनाफा बनाए रखने का दबाव भी बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कई कंपनियां सीधे कीमतें बढ़ाने के बजाय पैकेट का वजन कम करने या प्रीमियम उत्पादों पर अधिक ध्यान देने की रणनीति अपना सकती हैं। यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है और मानसून उम्मीद के मुताबिक नहीं रहता, तो आने वाले समय में आम आदमी के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है