2025 की पहली छमाही में घरेलू यात्री वाहनों की बिक्री धीमी, मारुति-ह्युंडै जैसे ब्रांडों पर दिखा असर

Edited By Updated: 02 Jul, 2025 02:51 PM

domestic passenger vehicle sales slow in the first half of 2025

वर्ष 2025 की पहली छमाही में भारत में घरेलू यात्री वाहनों (PV) की मांग कुछ धीमी रही है। देश की प्रमुख कार निर्माता कंपनियों मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और ह्युंडै को इस दौरान बिक्री में गिरावट का सामना करना पड़ा है। वहीं, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M)...

बिजनेस डेस्कः वर्ष 2025 की पहली छमाही में भारत में घरेलू यात्री वाहनों (PV) की मांग कुछ धीमी रही है। देश की प्रमुख कार निर्माता कंपनियों मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और ह्युंडै को इस दौरान बिक्री में गिरावट का सामना करना पड़ा है। वहीं, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) और स्कोडा जैसी कंपनियों ने अपने नए मॉडल्स की बदौलत इस गिरावट के ट्रेंड से खुद को काफी हद तक बचा लिया।

ऑटोमोबाइल सेक्टर के शुरुआती अनुमान बताते हैं कि जून 2025 में थोक स्तर पर वाहन डिस्पैच 6.4% घटकर करीब 3.2 लाख यूनिट्स पर आ गया, जबकि खुदरा बिक्री (रजिस्ट्रेशन) 4.4% गिरकर 2.94 लाख यूनिट रही।

मारुति सुजुकी, जो देश की सबसे बड़ी यात्री वाहन निर्माता है, ने इस साल की पहली छमाही में 2.2% गिरावट के साथ 8.80 लाख से कुछ अधिक वाहनों की डिलीवरी की। अकेले जून महीने में कंपनी की डिस्पैच 13.3% गिरकर 1.18 लाख यूनिट्स पर आ गई। खासतौर पर यूटिलिटी वाहन श्रेणी में भी गिरावट देखी गई, जो 52,373 से घटकर 47,947 रह गई।

टाटा मोटर्स के पैसेंजर व्हीकल और ईवी यूनिट के मैनेजिंग डायरेक्टर शैलेश चंद्रा ने कहा कि मई और जून में मांग में काफी सुस्ती रही, जिससे वॉल्यूम दबाव देखने को मिला। हालांकि इलेक्ट्रिक वाहनों की श्रेणी में अच्छा प्रदर्शन देखने को मिला, जो नए मॉडलों की वजह से मुमकिन हो सका।

ह्युंडै मोटर इंडिया ने भी साल की पहली छमाही में 7.7% की गिरावट दर्ज की और इस दौरान 2.85 लाख वाहन डिस्पैच किए। जून महीने में यह गिरावट और तेज रही, जब बिक्री 12% घटकर 44,024 यूनिट्स रह गई।

इसके विपरीत, महिंद्रा एंड महिंद्रा ने शानदार प्रदर्शन किया। कंपनी ने 2025 की पहली छमाही में 3.01 लाख से ज्यादा वाहनों की बिक्री कर 20% की ग्रोथ दर्ज की। जून में बिक्री 18% बढ़कर 47,306 यूनिट्स पर पहुंच गई, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 40,022 थी। M&M की ग्रोथ में इसके इलेक्ट्रिक वाहनों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्हें कंपनी ने मार्च से डीलर्स तक भेजना शुरू किया था।

कुल मिलाकर, जबकि कुछ दिग्गज कंपनियों को बाजार की धीमी गति का असर झेलना पड़ा, वहीं इलेक्ट्रिक सेगमेंट और नए मॉडल पेश करने वाली कंपनियों ने इस मंदी में भी अपना ग्रोथ कायम रखा।
 

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