egg prices Rise: पोल्ट्री उद्योग पर महंगे मक्के का असर, 40% तक चढ़े अंडों के दाम, और बढ़ सकती हैं कीमतें

Edited By Updated: 26 Aug, 2026 02:54 PM

expensive corn is impacting the poultry industry egg prices rising by 40

चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच इथेनॉल की बढ़ती मांग का असर अब पोल्ट्री सेक्टर पर भी दिखाई देने लगा है। इथेनॉल उत्पादन के लिए मक्के की खपत बढ़ने से पोल्ट्री फीड की लागत बढ़ गई है। इसका सीधा असर अंडों की कीमतों पर पड़ रहा है। पिछले एक साल

नई दिल्लीः चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच इथेनॉल की बढ़ती मांग का असर अब पोल्ट्री सेक्टर पर भी दिखाई देने लगा है। इथेनॉल उत्पादन के लिए मक्के की खपत बढ़ने से पोल्ट्री फीड की लागत बढ़ गई है। इसका सीधा असर अंडों की कीमतों पर पड़ रहा है। पिछले एक साल में अंडों के दाम करीब 35-40 फीसदी बढ़ चुके हैं और सर्दियों में मांग बढ़ने के साथ कीमतों में और तेजी की आशंका जताई जा रही है।

नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी के आंकड़ों के मुताबिक, फार्म स्तर पर एक अंडे की कीमत करीब 7 रुपए पहुंच गई है, जबकि खुदरा बाजार में यह 8.50 से 9 रुपए के आसपास बिक रहा है।

इथेनॉल के लिए बढ़ी मक्के की खपत

सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के तहत पेट्रोल में जैव ईंधन की मिलावट बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके चलते इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के साथ मक्के की मांग भी तेजी से बढ़ी है।

उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल मक्का उत्पादन का करीब 37 फीसदी हिस्सा अब इथेनॉल डिस्टिलरी में इस्तेमाल हो रहा है। भारत का कुल मक्का उत्पादन लगभग 4.34 करोड़ टन बताया जाता है, जिसमें करीब 1.7 करोड़ टन मक्का इथेनॉल उत्पादन में जा रहा है।

इस बढ़ती मांग ने मक्के की कीमतों पर दबाव बढ़ाया है। करीब तीन साल पहले जो मक्का लगभग 14,000 रुपए प्रति टन में मिलता था, उसकी कीमत अब करीब 26,500 रुपए प्रति टन तक पहुंच गई है। पिछले पांच महीनों में ही कीमतों में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

पोल्ट्री किसानों की बढ़ी लागत

पोल्ट्री उद्योग के लिए मक्का सबसे अहम कच्चे माल में से एक है। उद्योग के मुताबिक, फीड की लागत में मक्के की हिस्सेदारी काफी बड़ी है और कुल पोल्ट्री उत्पादन लागत का करीब 65-70 फीसदी हिस्सा फीड से जुड़ा होता है। ऐसे में मक्के की कीमत बढ़ने से मुर्गीपालन की लागत भी तेजी से बढ़ रही है।

मक्के से इथेनॉल उत्पादन में भी कुछ ही वर्षों में बड़ा विस्तार हुआ है। 2022 में इसके लिए करीब 10 लाख टन मक्का इस्तेमाल होता था, जो 2024 में बढ़कर 60 लाख टन से अधिक हो गया। अब यह खपत करीब 1.7 करोड़ टन बताई जा रही है। उद्योग का अनुमान है कि 2030 तक यह आंकड़ा 2.5 करोड़ टन तक पहुंच सकता है।

बढ़ा मक्का आयात का दबाव

घरेलू मांग बढ़ने से भारत की मक्का व्यापार स्थिति भी बदल रही है। पहले भारत बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों को मक्का निर्यात करता था लेकिन अब घरेलू जरूरतें बढ़ने के कारण आयात पर निर्भरता बढ़ रही है।

वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का मक्का आयात करीब 10 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घरेलू उत्पादन में मांग के अनुरूप बढ़ोतरी नहीं हुई, तो आने वाले वर्षों में आयात और बढ़ सकता है। इसका असर पोल्ट्री फीड की लागत और अंततः अंडे की कीमतों पर पड़ने की संभावना है।
 

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!