‘100% शाकाहारी’ और ‘कोलेस्ट्रॉल फ्री’ दावे पर घिरा Fortune Soya Oil, HC पहुंचा मामला

Edited By Updated: 01 Sep, 2026 04:25 PM

fortune soya oil faces scrutiny over 100 vegetarian and cholesterol free

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 'फॉर्च्यून सोया हेल्थ रिफाइंड सोयाबीन ऑयल' के उत्पादन एवं बिक्री पर रोक लगाने वाले कारण बताओ नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से जवाब मांगा है।

नई दिल्लीः दिल्ली उच्च न्यायालय ने 'फॉर्च्यून सोया हेल्थ रिफाइंड सोयाबीन ऑयल' के उत्पादन एवं बिक्री पर रोक लगाने वाले कारण बताओ नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड ने एफएसएसएआई द्वारा उसके उत्पाद के लेबल पर '100 प्रतिशत शाकाहारी' और 'कोलेस्ट्रॉल मुक्त—फॉर हेल्दी लाइफस्टाइल' जैसे दावे किए जाने पर जारी नोटिस को चुनौती दी है। 

खाद्य नियामक ने याचिका की सुनवाई पर क्षेत्राधिकार के आधार पर आपत्ति जताते हुए कहा कि याचिकाकर्ता कंपनी गुजरात में स्थित है और उत्पाद का उत्पादन एवं विपणन दिल्ली के बाहर होता है। इसलिए दिल्ली उच्च न्यायालय के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र में इस मामले से जुड़ा कोई कारण उत्पन्न नहीं हुआ। हालांकि, न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि याचिका को क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र के अभाव वाला नहीं माना जा सकता, क्योंकि याचिकाकर्ता द्वारा सीधे चुनौती दी गई मूल कार्रवाई एफएसएसएआई ने दिल्ली में की है और इसी कार्रवाई के आधार पर याचिका में राहत मांगी गई है। 

अदालत ने सोमवार को अपने आदेश में कहा कि एफएसएसएआई के दोनों संबंधित अधिकारी अदालत के क्षेत्राधिकार दायरे में आते हैं। इसलिए याचिका में मांगी गई मुख्य राहत के संबंध में जिन अधिकारियों के खिलाफ रिट मांगी गई है, वे इस अदालत के अधिकार क्षेत्र में हैं। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई पांच नवंबर को तय की। याचिका के अनुसार, एफएसएसएआई ने 17 जुलाई को कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन एवं दावा) विनियम, 2018 और खाद्य सुरक्षा एवं मानक (लेबलिंग एवं प्रदर्शन) विनियम, 2020 के कथित उल्लंघन का आरोप लगाया था। 

इसी दिन एफएसएसएआई ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को पत्र भेजकर 'गैर-अनुपालन वाले उत्पादों' के निर्माण, वितरण, विपणन और बिक्री पर रोक सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। कंपनी का कहना है कि इस पत्र के कारण उसके उत्पाद को प्रभावी रूप से 'गैर-अनुपालन वाला उत्पाद' मान लिया गया और देशभर में उसके वितरकों, स्टॉकिस्ट, थोक तथा खुदरा विक्रेताओं पर कार्रवाई का खतरा पैदा हो गया। कंपनी के मुताबिक, अगस्त में उसके कुछ वितरकों ने सूचित किया कि खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने उनके परिसरों का दौरा कर उत्पाद की बिक्री रोकने को कहा। इसके बाद खुदरा विक्रेताओं ने नए ऑर्डर लेने से इनकार कर दिया और मौजूदा स्टॉक वापस लेने की मांग की।

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