Edited By jyoti choudhary,Updated: 09 Jun, 2026 06:04 PM

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने सरकार की तरफ से कर छूट दिए जाने के बाद 'पूर्ण सुलभ मार्ग' (एफएआर) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों में 8,794.74 करोड़ रुपए का निवेश किया है। भारतीय समाशोधन निगम लिमिटेड (सीसीआईएल) के आंकड़ों के मुताबिक, एफएआर...
मुंबईः विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने सरकार की तरफ से कर छूट दिए जाने के बाद 'पूर्ण सुलभ मार्ग' (एफएआर) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों में 8,794.74 करोड़ रुपए का निवेश किया है। भारतीय समाशोधन निगम लिमिटेड (सीसीआईएल) के आंकड़ों के मुताबिक, एफएआर प्रतिभूतियों में एफपीआई की हिस्सेदारी तीन जून के 3.23 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर मंगलवार को 3.32 लाख करोड़ रुपए हो गई।
पूर्ण सुलभ मार्ग के तहत विदेशी निवेशकों को किसी तरह की निवेश सीमा के बगैर भारत सरकार की निर्धारित प्रतिभूतियों में निवेश की अनुमति होती है। सरकार ने पांच जून को आयकर अधिनियम में संशोधन करते हुए सरकारी बॉन्ड में एफपीआई निवेश पर मिलने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ को कर से छूट दी थी। यह छूट एक अप्रैल, 2025 से प्रभावी मानी जाएगी।
अरेटे कैपिटल के उपाध्यक्ष माताप्रसाद पांडेय ने कहा, ''इस कदम से एफपीआई निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और वे सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश बढ़ा रहे हैं। इससे भारत को प्रमुख वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों में शामिल किए जाने की संभावना भी मजबूत हो सकती है।'' भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी हालिया मौद्रिक नीति में एफएआर के दायरे का विस्तार करते हुए 15, 30 और 40 वर्ष की अवधि वाले नए सरकारी बॉन्ड को इसमें शामिल किया है। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक ने एफपीआई निवेश से जुड़े कुछ प्रतिबंध भी हटाए हैं, जिससे विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।