Edited By jyoti choudhary,Updated: 16 Feb, 2026 05:18 PM

अगर आपको लगता है कि शेयर बाजार या प्रॉपर्टी ही सबसे बेहतर रिटर्न देते हैं, तो ताजा आंकड़े आपकी सोच बदल सकते हैं। FundsIndia की Wealth Conversations Report के अनुसार, लंबी अवधि में सोना अन्य प्रमुख एसेट क्लासों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करता नजर...
बिजनेस डेस्कः अगर आपको लगता है कि शेयर बाजार या प्रॉपर्टी ही सबसे बेहतर रिटर्न देते हैं, तो ताजा आंकड़े आपकी सोच बदल सकते हैं। FundsIndia की Wealth Conversations Report के अनुसार, लंबी अवधि में सोना अन्य प्रमुख एसेट क्लासों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करता नजर आया है।
रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2026 तक के 20 सालों में सोने ने करीब 15.6% का CAGR रिटर्न दिया, जबकि Nifty 50 का रिटर्न लगभग 12.6% रहा। वहीं रियल एस्टेट और डेट इंस्ट्रूमेंट्स का औसत रिटर्न क्रमशः 7.8% और 7.6% दर्ज किया गया।
छोटे अंतर का बड़ा असर
विश्लेषण बताता है कि 2-3 फीसदी का अंतर लंबे समय में बड़ा फासला बना देता है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई निवेशक हर साल 1 लाख रुपए निवेश करे, तो 12.6% की दर से 20 साल में यह रकम लगभग 87 लाख रुपए हो सकती है। वहीं 15.6% की दर से यही निवेश करीब 1.27 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।
रियल एस्टेट और डेट क्यों पीछे?
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का रियल एस्टेट बाजार असमान और क्षेत्र विशेष पर निर्भर है, जिससे एक समान रिटर्न मापना मुश्किल होता है। NHB Residex Index को बेंचमार्क मानने के बावजूद, दीर्घकालिक स्थिरता और रिटर्न के मामले में सोना आगे रहा।
उतार-चढ़ाव के बावजूद मजबूती
हालांकि सोने में हर साल 10–15% तक का उतार-चढ़ाव देखा जाता है लेकिन ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार लगभग 78% मौकों पर साल के अंत तक यह सकारात्मक रिटर्न देता है। कुछ अवधियों—जैसे 1980-89, 1996-2002 और 2012-19—में प्रदर्शन कमजोर रहा लेकिन लंबी अवधि में सोना महंगाई से ऊपर रिटर्न देने में सफल रहा है।
निवेशकों की बढ़ती भागीदारी
जनवरी 2026 में गोल्ड ETF में 24,000 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश दर्ज किया गया, जो पिछले महीने की तुलना में काफी अधिक है। विशेषज्ञों की राय है कि किसी भी संतुलित पोर्टफोलियो में 10–15% हिस्सेदारी सोने की होनी चाहिए, ताकि बाजार की अनिश्चितता के समय स्थिरता बनी रहे।
कुल मिलाकर, हाल के वर्षों में सोना सिर्फ एक सुरक्षित निवेश विकल्प ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है।