PM मोदी-स्पीकर की वीडियो बनाना कांग्रेस को पड़ा भारी, 9 नेताओं को नोटिस जारी

Edited By Updated: 16 Feb, 2026 09:13 PM

making a video of pm modi and the speaker proved costly for the congress

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार किए गए कथित वीडियो को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष से जुड़ी सामग्री साझा करने के आरोप में लोकसभा सचिवालय ने कांग्रेस के नौ नेताओं को नोटिस जारी किया है। इन नेताओं से विशेषाधिकार...

नेशनल डेस्क : कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार किए गए कथित वीडियो को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष से जुड़ी सामग्री साझा करने के आरोप में लोकसभा सचिवालय ने कांग्रेस के नौ नेताओं को नोटिस जारी किया है। इन नेताओं से विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना के आरोपों पर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

9 नेताओं को नोटिस, तीन दिन में जवाब तलब

नोटिस पाने वालों में Jairam Ramesh, Pawan Khera, Supriya Shrinate और Sanjeev Singh सहित कुल नौ नेता शामिल हैं। लोकसभा सचिवालय ने कहा है कि संबंधित वीडियो साझा किए जाने से सदन की गरिमा और संवैधानिक पदों की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है, इसलिए जवाब आवश्यक है।

एआई वीडियो से बढ़ा विवाद

विवाद की जड़ एक 36 सेकंड का वीडियो है, जिसे सितंबर 2025 में बिहार कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किया गया था। इस वीडियो में प्रधानमंत्री की दिवंगत माताजी को राजनीतिक टिप्पणी करते हुए दर्शाया गया था।

इसके अलावा दिसंबर में लोकसभा अध्यक्ष से जुड़ा एक और वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्हें कथित तौर पर ‘आर्थिक सहायता स्वावलंबन’ नामक योजना के तहत आर्थिक मदद की घोषणा करते दिखाया गया। बाद में इसे भी एआई आधारित डीपफेक सामग्री बताया गया।

जांच में सामने आई सच्चाई

सरकारी एजेंसी Press Information Bureau की फैक्ट-चेक इकाई ने जांच के बाद स्पष्ट किया कि वीडियो में छेड़छाड़ की गई थी। मूल वीडियो 1 दिसंबर 2025 का था, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष दिवंगत सांसदों को श्रद्धांजलि दे रहे थे, लेकिन ऑडियो और आवाज को कृत्रिम रूप से बदला गया था। मामले में Delhi Police ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की। वहीं Patna High Court ने कांग्रेस को निर्देश दिया कि संबंधित वीडियो को तत्काल सोशल मीडिया से हटाया जाए।

एआई और राजनीति: नई चुनौती

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर राजनीति में एआई और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल दौर में फर्जी सामग्री तेजी से फैलती है, जिससे जनमत और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में इस मामले पर जवाब और कार्रवाई राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती है।

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