Edited By jyoti choudhary,Updated: 10 Mar, 2026 11:53 AM

अमेरिका–ईरान युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखने लगा है। एलएनजी सप्लाई प्रभावित होने के बाद केंद्र सरकार ने देशभर में प्राकृतिक गैस की राशनिंग लागू करने का फैसला लिया है। Ministry of Petroleum and...
बिजनेस डेस्कः अमेरिका–ईरान युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखने लगा है। एलएनजी सप्लाई प्रभावित होने के बाद केंद्र सरकार ने देशभर में प्राकृतिक गैस की राशनिंग लागू करने का फैसला लिया है। Ministry of Petroleum and Natural Gas ने Essential Commodities Act, 1955 के तहत आदेश जारी कर 9 मार्च 2026 से पूरे देश में गैस राशनिंग (Gas Rationing) लागू कर दी है।
सरकार ने घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में भी बदलाव किया है। अब एक सिलेंडर की डिलीवरी के बाद दूसरे सिलेंडर की बुकिंग के लिए 21 दिन की बजाय 25 दिन का इंतजार करना होगा। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य सीमित गैस संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण सुनिश्चित करना है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय संकट का सीधा असर आम लोगों की रसोई और सार्वजनिक परिवहन पर न पड़े।
इन क्षेत्रों को दी जाएगी सबसे ज्यादा प्राथमिकता
सरकार ने गैस आवंटन के लिए प्राथमिकता सूची तैयार की है, जिसमें आम जनता से जुड़े जरूरी क्षेत्रों को सबसे पहले रखा गया है। इनमें शामिल हैं:
- घरेलू PNG: पाइपलाइन के जरिए घरों तक पहुंचने वाली रसोई गैस
- CNG परिवहन: वाहनों में इस्तेमाल होने वाली कंप्रेस्ड नेचुरल गैस
- LPG उत्पादन: रसोई गैस सिलेंडर की रिफिलिंग और उत्पादन
- उर्वरक उद्योग: देश की खाद्य सुरक्षा के लिए खाद बनाने वाले कारखाने
- चाय उद्योग और शहरी गैस वितरण: स्थानीय अर्थव्यवस्था और नागरिक सेवाओं से जुड़े क्षेत्र
किसे कितनी गैस मिलेगी
नई व्यवस्था के तहत गैस आपूर्ति को प्रतिशत के आधार पर बांटा गया है:
- 100% आपूर्ति: घरेलू PNG, CNG और LPG उत्पादन इकाइयों को पूरी गैस मिलेगी
- 70% आपूर्ति: उर्वरक संयंत्रों को उनकी मांग का 70% गैस दी जाएगी
- 80% आपूर्ति: चाय उद्योग और अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को लगभग 80% गैस मिलेगी
कुछ उद्योगों की गैस आपूर्ति में कटौती
जरूरी सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने के लिए सरकार ने गैर-प्राथमिकता वाले उद्योगों की गैस सप्लाई में कटौती का फैसला किया है। इसमें पेट्रोकेमिकल प्लांट, बिजली उत्पादन इकाइयां और तेल रिफाइनरियां शामिल हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि गैस राशनिंग से जुड़ा यह आदेश कंपनियों के बीच पहले से मौजूद गैस सप्लाई अनुबंधों से भी ऊपर माना जाएगा, ताकि जरूरत के समय संसाधनों का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर किया जा सके।
गैस राशनिंग क्या है?
गैस राशनिंग का मतलब है कि जब प्राकृतिक गैस या एलएनजी (LNG) की सप्लाई कम हो जाती है, तब सरकार तय नियमों के अनुसार अलग-अलग सेक्टर और उपभोक्ताओं को सीमित मात्रा में गैस बांटती है यानी गैस की उपलब्धता के हिसाब से उसका नियंत्रित वितरण (controlled distribution) किया जाता है ताकि जरूरी सेवाएं प्रभावित न हों।