Edited By jyoti choudhary,Updated: 05 Jan, 2026 11:16 AM

भारत और चीन के बीच वैश्विक मंच पर वर्चस्व की होड़ लगातार तेज होती जा रही है। कई सेक्टरों में यह प्रतिस्पर्धा अब रणनीतिक टकराव का रूप ले चुकी है। भारत की कोशिश है कि वह दुनिया की ग्लोबल सप्लाई चेन का केंद्र बने, हालांकि यह लक्ष्य आसान नहीं है। इसके...
बिजनेस डेस्कः भारत और चीन के बीच वैश्विक मंच पर वर्चस्व की होड़ लगातार तेज होती जा रही है। कई सेक्टरों में यह प्रतिस्पर्धा अब रणनीतिक टकराव का रूप ले चुकी है। भारत की कोशिश है कि वह दुनिया की ग्लोबल सप्लाई चेन का केंद्र बने, हालांकि यह लक्ष्य आसान नहीं है। इसके लिए भारत को चीन को कई मोर्चों पर पीछे छोड़ना होगा। इसी दिशा में भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
चावल उत्पादन में भारत नंबर-1
भारत ने चावल उत्पादन के मामले में चीन को पछाड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक देश बनने का गौरव हासिल कर लिया है। यह जानकारी केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी। उन्होंने बताया कि भारत का कुल चावल उत्पादन 15.18 करोड़ टन तक पहुंच गया है, जबकि चीन का उत्पादन 14.5 करोड़ टन रहा।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम में कृषि मंत्री ने 25 फसलों की 184 उन्नत किस्मों को जारी किया। ये किस्में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा विकसित की गई हैं। चौहान ने कहा कि उच्च उपज देने वाले बीजों के इस्तेमाल से न केवल फसल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों की आय में भी इजाफा होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ये नई किस्में जल्द से जल्द किसानों तक पहुंचाई जाएं।
बीज विकास में बड़ी उपलब्धि
कृषि मंत्री ने बताया कि वर्ष 1969 में राजपत्र अधिसूचना प्रक्रिया शुरू होने के बाद से अब तक 7,205 फसल किस्मों को अधिसूचित किया जा चुका है। इनमें चावल, गेहूं, मक्का, ज्वार, दालें, तिलहन और फाइबर फसलें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद मोदी सरकार ने 3,236 अधिक उपज देने वाली किस्मों को मंजूरी दी है, जबकि 1969 से 2014 के बीच 3,969 किस्मों को अधिसूचित किया गया था।
वैश्विक खाद्य प्रदाता बना भारत
चौहान ने कहा कि भारत अब भोजन की कमी वाले देश से वैश्विक खाद्य आपूर्तिकर्ता बन चुका है। देश के पास पर्याप्त खाद्यान्न भंडार मौजूद है, जिससे खाद्य सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित है। उन्होंने कहा कि भारत अब विदेशी बाजारों में भी चावल की मजबूत आपूर्ति कर रहा है।
कृषि में नए युग की शुरुआत
कृषि मंत्री ने कहा कि जलवायु अनुकूल और अधिक उपज देने वाले बीजों के विकास के चलते भारत कृषि क्रांति के एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। रविवार को जारी की गई 184 उन्नत किस्में किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित होंगी और कृषि क्षेत्र को नई मजबूती देंगी।