Edited By jyoti choudhary,Updated: 05 Jan, 2026 02:22 PM

घरेलू उत्पादन में गिरावट से चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले आठ महीने में भारत का यूरिया आयात दोगुने से अधिक होकर 71.7 लाख टन हो गया है जो किसानों की मांग को पूरा करने के लिए विदेशी आपूर्ति पर देश की बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है। फर्टिलाइजर एसोसिएशन...
नई दिल्लीः घरेलू उत्पादन में गिरावट से चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले आठ महीने में भारत का यूरिया आयात दोगुने से अधिक होकर 71.7 लाख टन हो गया है जो किसानों की मांग को पूरा करने के लिए विदेशी आपूर्ति पर देश की बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है। फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-नवंबर 2024-25 के दौरान यूरिया का आयात पिछले वर्ष की इसी अवधि के 32.6 लाख टन की तुलना में 120.3 प्रतिशत बढ़कर 71.7 लाख टन हो गया। आंकड़ों के अनुसार, घरेलू यूरिया उत्पादन अप्रैल 2025 से नवंबर 2025 के बीच 3.7 प्रतिशत घटकर 1.97 करोड़ टन रहा। कुल यूरिया बिक्री 2.3 प्रतिशत बढ़कर 2.54 करोड़ टन तक पहुंच गई।
एफएआई के चेयरमैन एस. शंकर सुब्रमण्यम ने एक बयान में कहा, ''हालांकि हमने समन्वित योजना के माध्यम से बिक्री में वृद्धि हासिल की है लेकिन आयात पर महत्वपूर्ण निर्भरता (विशेष रूप से यूरिया और डीएपी के लिए) रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन के महत्व को दर्शाती है।'' यूरिया का आयात नवंबर माह में 68.4 प्रतिशत बढ़कर 13.1 करोड़ टन हो गया, जबकि नवंबर 2024 में यह 7.8 लाख टन था। यूरिया की बिक्री पिछले वर्ष की तुलना में नवंबर माह में 4.8 प्रतिशत बढ़कर 37.5 लाख टन हो गई। अन्य महत्वपूर्ण मृदा पोषक तत्व, डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की आयात पर निर्भरता भी बढ़ रही है। डीएपी का आयात अब कुल आपूर्ति का 67 प्रतिशत है जो पिछले वर्ष 56 प्रतिशत था। वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल-नवंबर के दौरान इसकी बिक्री 71.2 लाख टन पर स्थिर रही। घरेलू डीएपी उत्पादन में 5.2 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 26.8 लाख टन रह गया। एफएआई के महानिदेशक डॉ. सुरेश कुमार चौधरी ने कहा कि इन आंकड़ों में दो प्रमुख बातें सामने आई हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘पहला, नाइट्रोजन और फॉस्फेट पोषक तत्वों के लिए आयात-आधारित आपूर्ति प्रबंधन की ओर संरचनात्मक बदलाव है। दूसरा, एसएसपी जैसे स्वदेशी फॉस्फेट उर्वरकों का मजबूत प्रदर्शन है जिनकी बिक्री में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।'' चौधरी ने कहा, ‘‘यह एक संतुलित दृष्टिकोण का संकेत है। हम नियोजित आयात के माध्यम से महत्वपूर्ण पोषक तत्वों को सुरक्षित कर रहे हैं। साथ ही घरेलू स्तर पर फॉस्फेट उत्पादन को भी मजबूत कर रहे हैं। भविष्य में एफएआई, सतत कृषि को समर्थन देने के लिए डेटा-आधारित योजना और पोषक तत्वों के उपयोग में विविधता लाने पर ध्यान केंद्रित करेगा।'' केंद्र सरकार द्वारा यूरिया पर सब्सिडी दी जाती है। एक नवंबर 2012 से इसकी कीमत 242 रुपये प्रति 45 किलोग्राम बोरा (नीम कोटिंग शुल्क व करों को छोड़कर) पर यथावत है। नई यूरिया नीति के तहत नियंत्रित वस्तु के रूप में वर्गीकृत यूरिया को फॉस्फेटिक उर्वरक की तुलना में काफी अधिक सब्सिडी मिलती है।