भारतीय कंपनियों की आय मजबूत, जून तिमाही में राजस्व 22% बढ़ा: इक्रा

Edited By Updated: 13 Aug, 2026 04:33 PM

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शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों में से 838 के कुल राजस्व में चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह मार्च तिमाही में दर्ज 13 प्रतिशत वृद्धि से अधिक है। इससे भारतीय कंपनियों की आय में मजबूती का...

नई दिल्लीः शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों में से 838 के कुल राजस्व में चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह मार्च तिमाही में दर्ज 13 प्रतिशत वृद्धि से अधिक है। इससे भारतीय कंपनियों की आय में मजबूती का संकेत मिलता है, जिसने तेल क्षेत्र के कमजोर रुख के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया। घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा ने बृहस्पतिवार को यह कहा है।

हालांकि, पहली तिमाही में इन कंपनियों का सकल परिचालन लाभ मार्जिन (ओपीएम) सालाना आधार पर दो प्रतिशत अंक से अधिक घट गया और शुद्ध लाभ लगभग स्थिर रहा। इक्रा ने कहा कि इसका मुख्य कारण तेल शोधन क्षेत्र रहा, जहां कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और एलपीजी तथा पेट्रोलियम उत्पादों पर कम वसूली (लागत से कम दाम पर बिक्री) से कंपनियों का लाभ प्रभावित हुआ। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि यदि तेल एवं गैस क्षेत्र को अलग कर दिया जाए तो कंपनियों का परिचालन लाभ मार्जिन 19 प्रतिशत पर स्थिर रहा और शुद्ध लाभ में सालाना आधार पर 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई।

इक्रा ने बयान में कहा, ''अब तक घोषित नतीजों की समीक्षा से संकेत मिलता है कि भारतीय कंपनियों ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत उम्मीद से बेहतर की है। इक्रा के 838 सूचीबद्ध कंपनियों के नमूने में पहली तिमाही में राजस्व वृद्धि 22 प्रतिशत रही, जो पिछली तिमाही में दर्ज 13 प्रतिशत वृद्धि से अधिक है।'' रेटिंग एजेंसी के अनुसार, राजस्व वृद्धि को जिंसों और सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी से उत्पन्न मूल्य वृद्धि, पिछले साल जीएसटी दरों में कटौती से बनी मांग में मजबूती और वाहन क्षेत्र में जारी तेजी से समर्थन मिला। इसके अलावा पश्चिम एशिया में तनाव और अल नीनो की चिंताओं के बावजूद कुल खपत में मजबूती बनी रही। 

इक्रा के नमूने में वित्तीय क्षेत्र की कंपनियां और 50 करोड़ रुपए से कम वार्षिक राजस्व वाली कंपनियां शामिल नहीं हैं। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र कमजोर प्रदर्शन वाला क्षेत्र रहा है। कंपनियों की स्थिर मुद्रा आधार पर वृद्धि सीमित रही। वहीं सीमेंट और चीनी जैसे क्षेत्रों तथा कपड़ा और वाहन कलपुर्जा जैसे निर्यात आधारित क्षेत्रों में भी राजस्व वृद्धि कमजोर रही। इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और समूह प्रमुख (कॉरपोरेट रेटिंग) जितिन मक्कड़ ने कहा कि तिमाही की शुरुआत में मांग और लागत संबंधी चिंताओं ने बाजार धारणा को प्रभावित किया था लेकिन इसका वास्तविक असर सीमित रहा। खपत आधारित क्षेत्र ने वृद्धि को गति दी।

मक्कड़ ने कहा, ''वाहन क्षेत्र की मूल उपकरण विनिर्माता कंपनियों (ओईएम) ने सबसे मजबूत राजस्व वृद्धि दर्ज की। इसके अलावा एफएमसीजी (दैनिक उपयोग का सामान बनाने वाली कंपनियों), उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं, परिधान, किराना खुदरा, आभूषण खुदरा और त्वरित सेवा रेस्तरां जैसे उपभोक्ता केंद्रित क्षेत्रों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया।'' उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल और जिंस कीमतों में उतार-चढ़ाव तथा वैश्विक व्यापार माहौल में अनिश्चितता पर नजर रखनी होगी। हालांकि, मक्कड़ ने कहा कि भारतीय कंपनियों के मजबूत बही-खाते और बेहतर ऋण स्थिति आय में संभावित उतार-चढ़ाव तथा निकट अवधि के बाहरी झटकों से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करती है। 

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