ईरान संकट की मार भारत तक, ₹1500 करोड़ का निर्यात कारोबार खतरे में

Edited By Updated: 17 Jan, 2026 12:58 PM

iran crisis impacts india 1500 crore export business at risk

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़ी वैश्विक उथल-पुथल का असर अब भारत में भी साफ दिखाई देने लगा है। इसका सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश पर पड़ रहा है, जहां से बड़े पैमाने पर कृषि और खाद्य उत्पादों का निर्यात किया जाता है। मौजूदा हालात के चलते...

बिजनेस डेस्कः मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़ी वैश्विक उथल-पुथल का असर अब भारत में भी साफ दिखाई देने लगा है। इसका सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश पर पड़ रहा है, जहां से बड़े पैमाने पर कृषि और खाद्य उत्पादों का निर्यात किया जाता है। मौजूदा हालात के चलते यूपी से ईरान को होने वाला करीब ₹1500 करोड़ का निर्यात कारोबार जोखिम में आ गया है, जिससे किसान, व्यापारी और निर्यातक सभी चिंतित हैं।

चावल के निर्यात पर सबसे ज्यादा मार

उत्तर प्रदेश से ईरान को लंबे समय से बासमती और गैर-बासमती चावल, फल-सब्जियां, दवाइयां, कपड़े, पशु आहार और इंजीनियरिंग उत्पाद भेजे जाते रहे हैं लेकिन मौजूदा संकट में सबसे ज्यादा नुकसान चावल के कारोबार को होता दिख रहा है।

निर्यातकों के मुताबिक, कई कंसाइनमेंट या तो रास्ते में ही दूसरे देशों के बंदरगाहों पर रोक दी गई हैं या फिर गुजरात के कांडला पोर्ट पर फंसी हुई हैं। भुगतान और डिलीवरी को लेकर अनिश्चितता बढ़ने के कारण अब तक ₹200 करोड़ से ज्यादा के ऑर्डर रद्द हो चुके हैं।

बासमती कारोबार पर मंडराया बड़ा खतरा

मेरठ स्थित बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान, मोदीपुरम के संयुक्त निदेशक डॉ. रितेश शर्मा के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने ईरान को करीब ₹6400 करोड़ मूल्य का बासमती चावल निर्यात किया था। पहले से ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण व्यापार दबाव में था लेकिन मौजूदा तनाव ने हालात और खराब कर दिए हैं।

निर्यातकों को आशंका है कि अगर ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए गए, तो यह कारोबार पूरी तरह ठप हो सकता है।

यूपी के कई जिले होंगे प्रभावित

भारतीय निर्यात परिषद, कानपुर के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव के मुताबिक, ईरान पर संभावित नए प्रतिबंधों की आशंका ने जोखिम कई गुना बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर कानपुर, गाजियाबाद, सीतापुर, लखीमपुर और सिद्धार्थ नगर जैसे जिलों पर पड़ेगा, जहां बड़ी संख्या में किसान और व्यापारी कृषि निर्यात पर निर्भर हैं।

किसानों और निर्यातकों की बढ़ी चिंता

कारोबारियों का कहना है कि अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो किसानों को उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिलेगा और निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। ऐसे में केंद्र सरकार से वैकल्पिक बाजारों की तलाश, बीमा सुविधा और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने की मांग तेज हो गई है।

ईरान संकट ने एक बार फिर दिखा दिया है कि वैश्विक तनाव की एक चिंगारी भी स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका दे सकती है।
 

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