Edited By jyoti choudhary,Updated: 02 Mar, 2026 01:43 PM

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब भारत के चावल निर्यात पर दिखने लगा है। निर्यातकों ने ईरान, अफगानिस्तान और खाड़ी देशों को होने वाले भुगतान में देरी और शिपिंग रुकावटों को लेकर चिंता जताई है। खासतौर पर बासमती चावल सबसे ज्यादा जोखिम में है,...
बिजनेस डेस्कः ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव का असर अब भारत के निर्यात कारोबार पर भी साफ दिखने लगा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब भारत के चावल निर्यात पर दिखने लगा है। निर्यातकों ने ईरान, अफगानिस्तान और खाड़ी देशों को होने वाले भुगतान में देरी और शिपिंग रुकावटों को लेकर चिंता जताई है। खासतौर पर बासमती चावल सबसे ज्यादा जोखिम में है, क्योंकि भारत के लगभग 50% निर्यात सऊदी अरब, ईरान, इराक, यूएई और यमन जैसे देशों को होते हैं।
अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमले के बाद क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ गई है। होरमुज जलडमरूमध्य के जरिए शिपिंग प्रभावित होने की आशंका के बीच भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (IREF) ने अपने सदस्यों को ईरान और खाड़ी देशों के लिए नए ‘कॉस्ट, इंश्योरेंस एंड फ्रेट’ (CIF) समझौते करने से बचने की सलाह दी है। CIF शर्तों में निर्यातक को खरीदार के बंदरगाह तक माल पहुंचाने का पूरा खर्च उठाना पड़ता है।
FOB शर्तों पर जोर
महासंघ ने सुझाव दिया है कि जहां संभव हो, ‘फ्री-ऑन-बोर्ड’ (FOB) शर्तों पर ही सौदे किए जाएं, ताकि मालभाड़ा, बीमा और अन्य जोखिम खरीदार पर रहें। चेतावनी दी गई है कि तनाव के कारण बंकर फ्यूल की कीमतें बढ़ सकती हैं और कंटेनर व बल्क जहाजों की उपलब्धता घट सकती है, जिससे मालभाड़ा अचानक महंगा हो सकता है।
बीमा प्रीमियम में उछाल की आशंका
अगर भू-राजनीतिक हालात और बिगड़ते हैं तो समुद्री बीमा प्रीमियम भी बढ़ सकते हैं। ऐसे में निर्यातकों को नए ऑर्डर लेते समय सतर्क रहने और बिना हेज किए सौदों से बचने की सलाह दी गई है।
60 लाख टन का निर्यात दांव पर
भारत ने 2024-25 में करीब 60 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया, जिसकी कीमत लगभग 50,000 करोड़ रुपए रही। पिछले एक महीने में बासमती के थोक दाम 10-15% तक बढ़ चुके हैं। ईरान इस चावल का प्रमुख बाजार है, इसलिए वहां की स्थिति का सीधा असर भारतीय कीमतों पर पड़ सकता है।
पंजाब-हरियाणा पर सबसे ज्यादा असर
पंजाब और हरियाणा प्रीमियम बासमती निर्यात में लगभग 75% योगदान देते हैं। शिपिंग कंपनियों द्वारा जहाज रोकने से बंदर अब्बास के जरिए अफगानिस्तान भेजी जा रही खेपें अटक गई हैं। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि हालात सामान्य होने तक व्यापार में अनिश्चितता बनी रह सकती है।