Edited By Anu Malhotra,Updated: 03 Mar, 2026 10:30 AM

होली की खुशियों के बीच भारतीय राजनीति के गलियारे से एक दुखद खबर सामने आई है। केरल की राजनीति के आधार स्तंभ और पूर्व केंद्रीय मंत्री केपी उन्नीकृष्णन अब हमारे बीच नहीं रहे। कोझिकोड के एक निजी अस्पताल में उन्होंने जीवन की अंतिम सांस ली, जिससे राजनीतिक...
senior congress leader died: होली की खुशियों के बीच भारतीय राजनीति के गलियारे से एक दुखद खबर सामने आई है। केरल की राजनीति के आधार स्तंभ और पूर्व केंद्रीय मंत्री केपी उन्नीकृष्णन अब हमारे बीच नहीं रहे। कोझिकोड के एक निजी अस्पताल में उन्होंने जीवन की अंतिम सांस ली, जिससे राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके जाने पर केरल के मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन ने गहरा दुख जताते हुए इसे एक अपूरणीय क्षति बताया है।
साल 1936 में जन्मे उन्नीकृष्णन महज़ एक नेता नहीं, बल्कि संसदीय लोकतंत्र की एक चलती-फिरती किताब थे। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वाटकरा लोकसभा सीट की जनता ने उन्हें लगातार पांच बार (1971 से 1996 तक) अपना प्रतिनिधि चुनकर संसद भेजा। सत्ता के गलियारों में उनकी साख इतनी मजबूत थी कि वीपी सिंह की सरकार में उन्हें दूरसंचार और जहाजरानी जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
इतिहास के पन्नों में उनका नाम एक संकटमोचक के रूप में भी दर्ज है। साल 1990 में जब खाड़ी युद्ध की वजह से हजारों भारतीयों की जान जोखिम में थी, तब उन्नीकृष्णन ने ही अपनी दूरदर्शिता और प्रशासनिक कौशल से वहां फंसे नागरिकों की सुरक्षित वतन वापसी में अहम भूमिका निभाई थी।