NSE के अपने मंच पर कारोबार की मंजूरी के लिए कोई प्रस्ताव नहीं: सेबी चेयरमैन

Edited By Updated: 17 Sep, 2026 02:48 PM

no proposal for trading on nse s own platform sebi chairman

सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने बृहस्पतिवार को कहा कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के सूचीबद्ध होने के बाद अपने ही मंच पर कारोबार की अनुमति संबंधी बाजार नियामक के पास कोई प्रस्ताव नहीं आया है। पांडेय ने 'नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग

मुंबईः सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने बृहस्पतिवार को कहा कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के सूचीबद्ध होने के बाद अपने ही मंच पर कारोबार की अनुमति संबंधी बाजार नियामक के पास कोई प्रस्ताव नहीं आया है। पांडेय ने 'नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट (नैबफिड) इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव 2026' से इतर पत्रकारों से कहा, ''नहीं, ऐसा कोई पत्र नहीं है और ऐसी कोई आवश्यकता भी नहीं है।'' उन्होंने कहा कि फिलहाल इस तरह के कारोबार की अनुमति नहीं दी जा सकती। 

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का बहुप्रतीक्षित 22,569 करोड़ रुपए का आईपीओ बृहस्पतिवार को अभिदान के लिए खुल गया। तीन दिन का यह निर्गम 21 सितंबर को बंद होगा। आईपीओ पूरी तरह मौजूदा शेयरधारकों द्वारा 12.64 करोड़ शेयर की बिक्री पेशकश (ओएफएस) है। कंपनी ने इस निर्गम के लिए प्रति शेयर 1,700-1,785 रुपये का मूल्य दायरा तय किया है। यह पूरी तरह बिक्री पेशकश है, इसलिए एनएसई को आईपीओ से कोई राशि नहीं मिलेगी। निर्गम खर्च को छोड़कर पूरी राशि बिक्री करने वाले शेयरधारकों को मिलेगी। कुछ ब्रोकर और परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों द्वारा यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने को लेकर उठाई गई चिंताओं पर पांडेय ने कहा कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) इन मुद्दों पर गौर करेगा। उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि इसमें कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। हम निश्चित रूप से इन पर गौर करेंगे और देखेंगे कि इन्हें कैसे आसान किया जा सकता है।'' सरकार ने 2,000 रुपए तक के यूपीआई लेनदेन पर कारोबारियों से शुल्क लेने से छूट दी है। 

मंगलवार को सरकार ने 2,000 रुपए से अधिक के यूपीआई भुगतान पर कारोबारियों से 0.4 प्रतिशत शुल्क तय किया और 75,000 रुपए या उससे अधिक के भुगतान पर शुल्क को 300 रुपए तक सीमित किया। इसके साथ ही बड़े डिजिटल कारोबारी भुगतान के लिए एक रूपरेखा लागू की गई। वायदा एवं विकल्प (एफएंडओ) कारोबार पर नियामक के अध्ययन के बारे में पांडेय ने कहा कि इसके निष्कर्षों से पता चला है कि तीन से चार साल तक कारोबार करने के बाद भी कई कारोबारियों को लगातार नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि अध्ययन में कारोबार के व्यवहार को लेकर भी शोध निष्कर्ष सामने आए हैं। 

पांडेय ने कहा, ''कारोबार करने के तीन-चार साल बाद भी बहुत से लोगों को लगातार नुकसान हो रहा है।'' उन्होंने कहा कि निवेशकों को यह आकलन करने की जरूरत है कि वे एफएंडओ बाजार के लिए उपयुक्त हैं या नहीं। नगरपालिका बॉन्ड बाजार पर पांडेय ने नगरपालिका प्रशासन और नगर निकायों की कर्ज चुकाने की क्षमता को प्रमुख मुद्दे बताया। उन्होंने कहा, ''महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक नगरपालिका प्रशासन और नगर निकायों की कर्ज चुकाने की क्षमता है... अब नियम तैयार हैं।'' 

पांडेय ने कहा कि भुगतान के लिए सहारा उपलब्ध कराने को एस्क्रो व्यवस्था लागू की गई है, जबकि साझा माध्यम से वित्तपोषण के और विकल्प भी प्रस्तावित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नगरपालिका निकायों की ओर से नगरपालिका बॉन्ड के जरिये धन जुटाने में अधिक भागीदारी से अन्य निकायों को भी इस बाजार का रुख करने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है। केंद्र सरकार नगरपालिका बॉन्ड के जरिये धन जुटाने वाले नगर निकायों को प्रोत्साहन भी दे रही है।
 

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