UPI यूजर्स के लिए राहत की खबर, ग्राहकों पर MDR का बोझ डालने पर लग सकती है रोक

Edited By Updated: 22 Aug, 2026 01:27 PM

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भारत में UPI से भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए राहत की खबर है। सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) UPI पेमेंट को लेकर एक अहम बदलाव पर विचार कर रहे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अगर भविष्य में बड़े कारोबारियों पर UPI...

नई दिल्लीः भारत में UPI से भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए राहत की खबर है। सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) UPI पेमेंट को लेकर एक अहम बदलाव पर विचार कर रहे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अगर भविष्य में बड़े कारोबारियों पर UPI ट्रांजैक्शन के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया जाता है, तो इसका अतिरिक्त बोझ ग्राहकों पर डालना आसान नहीं होगा।

सरकार और NPCI इस मामले में 2017 में आरबीआई की ओर से डेबिट कार्ड भुगतान को लेकर जारी किए गए नियम को आधार बना सकते हैं। उस व्यवस्था में बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था कि दुकानदार डेबिट कार्ड से भुगतान की लागत ग्राहकों से अलग से न वसूलें।

MDR को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?

अब तक UPI से भुगतान आम तौर पर ग्राहकों और कारोबारियों के लिए शुल्क-मुक्त रहा है लेकिन बड़े मर्चेंट्स पर MDR लागू करने की संभावित चर्चा के बाद सवाल उठने लगा है कि कहीं व्यापारी इस लागत की भरपाई ग्राहकों से न करने लगें।

इसी वजह से NPCI अपने UPI नियमों में ऐसा प्रावधान जोड़ने पर विचार कर रहा है, जिससे मर्चेंट्स के लिए तय शुल्क को सीधे ग्राहकों पर ट्रांसफर करने से रोका जा सके। नियमों को प्रभावी तरीके से लागू कराने में RBI की भूमिका अहम होगी।

कन्वीनियंस फीस से बढ़ सकता है विवाद

मामले में एक बड़ी चुनौती यह भी है कि कुछ कारोबारी सीधे MDR के नाम पर शुल्क लेने के बजाय ग्राहक के बिल में ‘कन्वीनियंस फीस’ या अन्य चार्ज जोड़ सकते हैं। इससे ग्राहक के लिए यह समझना मुश्किल हो सकता है कि उससे अतिरिक्त रकम किस वजह से ली जा रही है।

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, UPI के लिए अभी डेबिट कार्ड जैसा स्पष्ट सुरक्षा ढांचा मौजूद नहीं है। ऐसे में नए नियम आने पर यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि मर्चेंट किस तरह का शुल्क ग्राहक से नहीं वसूल सकता।

छोटे कारोबारियों को मिल सकती है राहत

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया पहले ही संकेत दे चुके हैं कि अगर UPI पर MDR लागू किया जाता है, तो इसका दायरा मुख्य रूप से मर्चेंट्स तक सीमित रखा जा सकता है। छोटे कारोबारियों को इससे बाहर रखने और उनके लिए UPI को मुफ्त बनाए रखने की संभावना भी है।

सरकारी अधिसूचना आने के बाद NPCI और UPI स्टीयरिंग कमेटी MDR की पूरी व्यवस्था और उसके नियमों पर फैसला कर सकते हैं।

नियम लागू करना होगी सबसे बड़ी चुनौती

नई व्यवस्था का सबसे मुश्किल हिस्सा इसका जमीनी स्तर पर पालन कराना होगा। अगर कोई दुकानदार ग्राहक से अतिरिक्त शुल्क वसूलता है, तो बैंक के लिए उस पर कार्रवाई करना तब तक मुश्किल हो सकता है, जब तक ग्राहक इसकी शिकायत न करे।

बैंकों के पास नियम तोड़ने वाले मर्चेंट्स पर कार्रवाई करने या गलत तरीके से लिया गया शुल्क वापस कराने के विकल्प मौजूद हैं। हालांकि, मर्चेंट्स के साथ कारोबारी संबंधों के कारण बैंकों के लिए सख्त कार्रवाई करना हमेशा आसान नहीं होता।

ऐसे में नए नियम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि RBI और NPCI शिकायतों की निगरानी और नियमों के पालन को कितनी मजबूती से लागू करते हैं। 

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