Why Share Market Crash: शेयर बाजार में हाहाकार, इन 4 कारणों से क्रैश हुआ मार्केट, निवेशकों के ₹3.58 लाख करोड़ स्वाहा

Edited By Updated: 24 Jul, 2026 11:18 AM

stock market in turmoil 4 reasons for market crash

शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 800 से अधिक अंक टूटकर 75,535 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 करीब 250 अंक फिसलकर 23,619 के स्तर पर आ गया। बाजार में आई इस कमजोरी का असर मिडकैप और...

बिजनेस डेस्कः शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 800 से अधिक अंक टूटकर 75,535 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 करीब 250 अंक फिसलकर 23,619 के स्तर पर आ गया। बाजार में आई इस कमजोरी का असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दिखा, जहां दोनों प्रमुख सूचकांक लगभग 1 प्रतिशत तक लुढ़क गए।

गुरुवार, 23 जुलाई को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,76,60,985.926 करोड़ रुपए रहा था। शुक्रवार को मार्केट खुलने के कुछ ही पलों के अंदर यह घटकर 4,73,02,449.65 करोड़ रुपए हो गया यानि कि 3,58,536.276 करोड़ रुपए की गिरावट।

बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण

1. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों में महंगाई और चालू खाते के घाटे को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। ऊंचे कच्चे तेल के दाम कंपनियों की लागत और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा सकते हैं।

2. पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव तथा क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हैं, जिसका असर शेयर बाजारों पर पड़ता है।

3. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी

अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बाद विदेशी निवेशकों के उभरते बाजारों से पूंजी निकालने की आशंका बढ़ गई है। सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ता रुझान भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना रहा है।

4. अमेरिका की नई टैरिफ नीति

अमेरिका द्वारा कई देशों पर नए आयात शुल्क लगाए जाने से वैश्विक व्यापार और आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंताएं गहरा गई हैं। निवेशकों को आशंका है कि बढ़ते टैरिफ से वैश्विक मांग प्रभावित हो सकती है, जिसका असर कॉरपोरेट आय और शेयर बाजारों पर पड़ेगा।

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