Edited By Pardeep,Updated: 26 Aug, 2026 10:28 PM

: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों पर सरकार द्वारा की गई सख्ती का असर अब बाजार में साफ दिखने लगा है। सरकार द्वारा थोक खरीदारों पर स्टॉक लिमिट लगाने और 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी देने के बाद कीमतें तेजी से नीचे आने लगी हैं।
नई दिल्ली: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों पर सरकार द्वारा की गई सख्ती का असर अब बाजार में साफ दिखने लगा है। सरकार द्वारा थोक खरीदारों पर स्टॉक लिमिट लगाने और 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी देने के बाद कीमतें तेजी से नीचे आने लगी हैं।
कोल्हापुर में भारी गिरावट, मुजफ्फरनगर में दाम स्थिर
नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड (NCDEX) के हाजिर बाजार (स्पॉट मार्केट) के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र के कोल्हापुर में मीडियम ग्रेड चीनी की कीमत जो 21 अगस्त को करीब 6,350 रुपये प्रति क्विंटल थी, वह महज चार दिनों में यानी 25 अगस्त तक गिरकर करीब 5,550 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गई है। इस प्रकार कोल्हापुर में चीनी की कीमतों में लगभग 12.59% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में इस अवधि के दौरान चीनी की कीमत करीब 5,800 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बनी हुई है।
घरेलू बाजार को मिलेगी बड़ी राहत, 5 दिन की मांग होगी पूरी
बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लगभग 3.5 लाख टन चीनी को घरेलू बाजार में भेजने की मंजूरी दे दी गई है, जिसे पहले विदेशों में निर्यात किया जाना था। यह स्टॉक एक सप्ताह के भीतर घरेलू खरीदारों के लिए उपलब्ध हो सकता है, जो देश की करीब 5 दिनों की कुल चीनी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। इससे त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने का अनुमान, आयात सीमा से कम रहेगा आयात
भारत में अगस्त के अंत से लेकर जनवरी तक त्योहारों का सीजन चलता है, जिस दौरान मिठाइयों और प्रोसेस्ड फूड की मांग बढ़ने से चीनी की खपत काफी ज्यादा हो जाती है। इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अक्टूबर के अंत तक भारत द्वारा 3 लाख से 6 लाख टन चीनी आयात किए जाने का अनुमान है। हालांकि, यह आंकड़ा सरकार द्वारा मंजूर की गई 10 लाख टन की सीमा से काफी कम है। घरेलू बाजार में कीमतें गिरने के कारण अब मिलों और रिफाइनरियों के लिए विदेशों से अधिक चीनी मंगाना कम फायदेमंद रह गया है।
चीनी मिलों पर बढ़ सकता है दबाव
कारोबारियों का मानना है कि यदि चीनी की कीमतें 5,000 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे चली जाती हैं और अगले सीजन तक यही स्थिति बनी रहती है, तो चीनी मिलों पर दबाव काफी बढ़ सकता है। वर्तमान में चीनी उत्पादन की लागत लगभग 4,200 से 4,300 रुपये प्रति क्विंटल आंकी जा रही है और अगला पेराई सीजन अक्टूबर के अंत में शुरू होने की संभावना है।