Budget 2026: राजकोषीय घाटे से GDP Growth तक, इन अहम आर्थिक आंकड़ों पर टिकी रहेंगी निगाहें

Edited By Updated: 31 Jan, 2026 05:27 PM

the budget of the world s fastest growing major economy

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को अपना लगातार नौवां आम बजट पेश कर एक नया रिकॉर्ड बनाने जा रही हैं। इस बजट में सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) सुधारों को लेकर खास उम्मीदें जताई जा रही हैं। वर्ष 2019 में अपने पहले बजट के दौरान पारंपरिक चमड़े...

बिजनेस डेस्कः केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को अपना लगातार नौवां आम बजट पेश कर एक नया रिकॉर्ड बनाने जा रही हैं। इस बजट में सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) सुधारों को लेकर खास उम्मीदें जताई जा रही हैं। वर्ष 2019 में अपने पहले बजट के दौरान पारंपरिक चमड़े के ब्रीफकेस की जगह लाल कपड़े में लिपटा ‘बही-खाता’ पेश कर उन्होंने परंपरा में बदलाव किया था। पिछले चार वर्षों की तरह इस बार भी बजट पूरी तरह पेपरलेस होगा।

बजट 2025-26 के प्रमुख आंकड़े, जिन पर रहेगी बाजार की नजर

राजकोषीय घाटा

सरकार के कुल खर्च और आय के अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इसे जीडीपी के 4.4 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है। बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इसे घटाकर चार प्रतिशत तक लाने का रोडमैप पेश करती है। इससे कर्ज-जीडीपी अनुपात में कमी की दिशा स्पष्ट होगी।

पूंजीगत व्यय (कैपेक्स)

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पूंजीगत व्यय 11.2 लाख करोड़ रुपए तय किया गया है। निजी निवेश में सुस्ती को देखते हुए सरकार बुनियादी ढांचे पर खर्च को प्राथमिकता दे सकती है। आगामी बजट में कैपेक्स में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है, जिससे यह आंकड़ा 12 लाख करोड़ रुपए से ऊपर जा सकता है।

कर्ज की रूपरेखा

वित्त मंत्री ने पिछले बजट में संकेत दिया था कि वित्त वर्ष 2026-27 से केंद्र सरकार के कर्ज को जीडीपी के अनुपात में घटाने पर जोर दिया जाएगा। फिलहाल 2024 में कर्ज-जीडीपी अनुपात करीब 85 प्रतिशत था, जिसमें केंद्र का हिस्सा 57 प्रतिशत रहा। बाजार यह देखना चाहेगा कि 60 प्रतिशत के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए सरकार किस समयसीमा का संकेत देती है।

उधारी

वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार की सकल उधारी 14.80 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए बाजार से ली जाने वाली यह उधारी देश की आर्थिक स्थिति और राजस्व संग्रह की मजबूती का अहम संकेतक मानी जाती है।

कर राजस्व

बजट 2025-26 में सकल कर राजस्व का लक्ष्य 42.70 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 11 प्रतिशत अधिक है। इसमें 25.20 लाख करोड़ रुपये प्रत्यक्ष करों (आयकर और कॉरपोरेट टैक्स) से और 17.5 लाख करोड़ रुपये अप्रत्यक्ष करों (सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और जीएसटी) से जुटाने का अनुमान है।

GST संग्रह

वित्त वर्ष 2025-26 में जीएसटी संग्रह 11 प्रतिशत बढ़कर 11.78 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। सितंबर 2025 में दरों में कटौती के बाद राजस्व में तेजी की उम्मीद है, इसलिए वित्त वर्ष 2026-27 के अनुमानों पर खास नजर रहेगी।

GDP वृद्धि

वित्त वर्ष 2025-26 में मौजूदा कीमतों पर जीडीपी वृद्धि दर 10.1 प्रतिशत आंकी गई है, जबकि वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। महंगाई के कम रहने के कारण मौजूदा कीमतों पर जीडीपी अनुमान घटाकर करीब आठ प्रतिशत किया गया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए यह वृद्धि 10.5 से 11 प्रतिशत के दायरे में रहने की संभावना जताई जा रही है।

बजट के इन अहम संकेतकों से सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं और आने वाले वित्त वर्ष की नीतिगत दिशा का स्पष्ट संकेत मिलने की उम्मीद है।
 

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