Edited By jyoti choudhary,Updated: 06 Apr, 2026 11:52 AM

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब साफ तौर पर भारतीय शेयर बाजार, खासकर बैंकिंग सेक्टर पर दिखने लगा है। वैश्विक अनिश्चितता और निवेशकों की सतर्कता के चलते बैंकिंग शेयरों में तेज गिरावट आई है, जिससे इस सेक्टर की मार्केट वैल्यू को बड़ा झटका लगा है।
बिजनेस डेस्कः मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब साफ तौर पर भारतीय शेयर बाजार, खासकर बैंकिंग सेक्टर पर दिखने लगा है। वैश्विक अनिश्चितता और निवेशकों की सतर्कता के चलते बैंकिंग शेयरों में तेज गिरावट आई है, जिससे इस सेक्टर की मार्केट वैल्यू को बड़ा झटका लगा है।
मार्च की शुरुआत से अब तक बैंकिंग सेक्टर को करीब 95 अरब डॉलर का नुकसान हो चुका है। Nifty Bank Index भी अपने हालिया उच्च स्तर से काफी नीचे आ गया है और ‘बेयर मार्केट’ की कगार पर पहुंच गया है। आने वाले दिनों में भारतीय बैंक शेयरों के लिए और भी मुश्किलें आने वाली हैं। इसकी वजह करेंसी बाजार में सेंट्रल बैंक के कदम और बढ़ती एनर्जी कीमतों से मुनाफे की संभावनाओं को नुकसान पहुंच रहा है।
क्यों बढ़ रहा है दबाव?
इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण सामने आ रहे हैं:
रुपए पर दबाव: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रुपए को संभालने के लिए किए जा रहे हस्तक्षेप से बाजार में लिक्विडिटी कम हो रही है।
महंगी ऊर्जा: मिडिल ईस्ट तनाव के चलते बढ़ती ऊर्जा कीमतें बैंकों के मुनाफे पर असर डाल सकती हैं।
ग्लोबल बिकवाली: विदेशी निवेशकों ने मार्च के पहले पखवाड़े में ही वित्तीय शेयरों से भारी पैसा निकाला।
आगे क्या है खतरा?
- कर्ज की मांग धीमी पड़ सकती है
- लोन रिकवरी में सुधार रुक सकता है
- सख्त मौद्रिक नीति से मार्जिन पर दबाव बढ़ेगा
वैल्यूएशन हुआ आकर्षक
हालांकि गिरावट के बाद अब कुछ एक्सपर्ट इसे अवसर के रूप में भी देख रहे हैं। Citibank जैसे संस्थान निजी बैंकों को ज्यादा मजबूत मान रहे हैं, क्योंकि वे मौजूदा आर्थिक दबावों को बेहतर तरीके से झेल सकते हैं।
मार्जिन पर असर तय
Fitch Ratings के अनुसार आने वाले समय में बैंकों का नेट इंटरेस्ट मार्जिन 0.20%–0.30% तक घट सकता है। वहीं करेंसी ट्रेडिंग से भी बैंकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।