RBI का बड़ा एक्शन : इस सहकारी बैंक का लाइसेंस रद्द, ग्राहकों में मची खलबली; जानें आपके पैसों का क्या होगा?

Edited By Updated: 20 May, 2026 05:44 AM

rbi action license of this cooperative bank cancelled

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकिंग नियमों की अनदेखी और खराब वित्तीय हालत के चलते महाराष्ट्र के फलटन स्थित ‘द यशवंत सहकारी बैंक’ (The Yashwant Sahakari Bank) पर बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय बैंक ने मंगलवार, 19 मई को तत्काल प्रभाव से इस बैंक का...

नई दिल्ली/मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकिंग नियमों की अनदेखी और खराब वित्तीय हालत के चलते महाराष्ट्र के फलटन स्थित ‘द यशवंत सहकारी बैंक’ (The Yashwant Sahakari Bank) पर बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय बैंक ने मंगलवार, 19 मई को तत्काल प्रभाव से इस बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया है। आरबीआई के इस फैसले के बाद 19 मई 2026 को कारोबार बंद होने के साथ ही यह बैंक अब किसी भी तरह की बैंकिंग गतिविधि संचालित नहीं कर पाएगा।

क्यों गिरी गाज?
आरबीआई के मुताबिक, बैंक के पास न तो पर्याप्त पूंजी बची थी और न ही भविष्य में आय की कोई संभावनाएं नजर आ रही थीं। बैंक बैंकिंग विनियमन अधिनियम के प्रावधानों का पालन करने में विफल रहा। मौजूदा वित्तीय स्थिति में बैंक अपने जमाकर्ताओं को उनकी पूरी राशि लौटाने में सक्षम नहीं था, जिसके चलते जनहित में इसका लाइसेंस रद्द करना जरूरी हो गया।

जमाकर्ताओं को मिलेंगे ₹5 लाख तक वापस
बैंक बंद होने की खबर से घबराए ग्राहकों के लिए राहत की बात यह है कि 99.02 प्रतिशत जमाकर्ताओं को उनकी पूरी जमा राशि वापस मिलने की पात्रता है। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक जमाकर्ता को जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (DICGC) के तहत 5 लाख रुपये तक की बीमा राशि मिलेगी। रिकॉर्ड के अनुसार, DICGC 20 अप्रैल, 2026 तक पहले ही 106.96 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुका है। अब महाराष्ट्र के सहकारिता आयुक्त एवं पंजीयक से बैंक को बंद करने और एक परिसमापक (Liquidator) नियुक्त करने का अनुरोध किया गया है।

NBFCs पर भी चला आरबीआई का चाबुक
आरबीआई ने केवल बैंकों ही नहीं, बल्कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के खिलाफ भी मोर्चा खोल रखा है। मई 2026 में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए देश भर की लगभग 150 NBFC कंपनियों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (CoR) रद्द किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक कंपनियां दिल्ली (करीब 67) और पश्चिम बंगाल (करीब 75) से हैं। इससे पहले कर्नाटक के 'द कारवार अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक' और चर्चित 'पेटीएम पेमेंट्स बैंक' पर भी नियमों के उल्लंघन के कारण ऐसी ही गाज गिर चुकी है।

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