IBC कानून से बैंकों को बड़ी राहत, 10 साल में 4 लाख करोड़ रुपए की वसूली

Edited By Updated: 20 May, 2026 06:23 PM

ibc law has provided significant relief to banks recovering 4 lakh crore

एक समय देश के सरकारी बैंक भारी बैड लोन के दबाव से जूझ रहे थे। बड़े कॉरपोरेट कर्ज की वसूली मुश्किल हो रही थी और बैंकिंग सेक्टर की बैलेंस शीट पर इसका सीधा असर दिख रहा था। ऐसे हालात में लागू किया गया दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता कानून (IBC) अब बैंकों के...

बिजनेस डेस्कः एक समय देश के सरकारी बैंक भारी बैड लोन के दबाव से जूझ रहे थे। बड़े कॉरपोरेट कर्ज की वसूली मुश्किल हो रही थी और बैंकिंग सेक्टर की बैलेंस शीट पर इसका सीधा असर दिख रहा था। ऐसे हालात में लागू किया गया दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता कानून (IBC) अब बैंकों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है।

वित्त सेवा सचिव एम. नागराजू के अनुसार, 28 मई 2016 से लागू इस कानून के तहत दिसंबर 2025 तक 8,800 से अधिक मामलों में समाधान प्रक्रिया शुरू की गई। इन मामलों के जरिए बैंकों को अब तक 4.11 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की वसूली हो चुकी है।

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हजारों मामलों का हुआ निपटारा

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 4,000 से ज्यादा कॉरपोरेट मामलों का समाधान समझौते, वापसी, अपील या पुनर्गठन जैसे तरीकों से किया गया है। IBC के जरिए अब केवल कंपनियों को बंद करने पर नहीं, बल्कि उनके पुनरुद्धार और परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग पर जोर दिया जा रहा है।

कर्ज समाधान प्रक्रिया हुई तेज

सरकार का कहना है कि IBC ने देश में समयबद्ध और लेनदार-केंद्रित दिवाला समाधान प्रणाली को मजबूत किया है। हाल के वर्षों में कानून में कई बदलाव भी किए गए हैं, जिनमें:

  • समूह दिवाला प्रक्रिया
  • सीमा-पार दिवाला समाधान
  • ऋणदाता-प्रेरित समाधान व्यवस्था

जैसे प्रावधान शामिल हैं, जिससे प्रक्रिया और प्रभावी हुई है।

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पारदर्शिता और विश्वास बढ़ा

भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) के चेयरपर्सन रवि मित्तल के मुताबिक, IBC ने बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाने और कर्जदाताओं का भरोसा मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। अब कंपनियों की संपत्तियों का बेहतर मूल्यांकन और समयबद्ध समाधान संभव हो पा रहा है।

180 दिनों में समाधान का लक्ष्य

पहले IBC मामलों के समाधान के लिए 330 दिनों तक का समय मिलता था लेकिन अब इसे घटाकर 180 दिन कर दिया गया है यानी डिफॉल्ट करने वाली कंपनियों को छह महीने के भीतर अपनी समाधान योजना पेश करनी होगी।

सरकार का मानना है कि इस कानून ने बैड लोन की समस्या को कम करने और बैंकिंग सेक्टर को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
 

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